रिजका फसल पर कटवर्म का हमला, चारा संकट से किसान परेशान

नई दिल्ली 06-Jan-2026 02:34 PM

रिजका फसल पर कटवर्म का हमला, चारा संकट से किसान परेशान

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। जलवायु परिवर्तन में चारा फसलों में भी कीट-रोग का प्रकोप बढने लगा है। इससे पशु के निवाले पर संकट खड़ा हो रहा है। क्योंकि, चारा फसल में दवा का छिडक़ाव इंसान के साथ-साथ पशुधन के लिए नुकसानदायी साबित होने का डर बना रहता है। क्योंकि, यदि किसान कीट नियंत्रण के लिए कीटनाशी का उपयोग करता है तो पशुधन के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य को खतरा पैदा होने का डर है। दूसरी ओर नियंत्रण के अभाव में किसानों को चारा फसल की उचित पैदावार नहीं मिलती है। पिछले कुछ सालों से कुछ ऐसी ही परेशानी से जूझ रहे है रिजका उत्पादक किसान। गौरतलब है कि इस फसल में पत्ती काटने वाली लट का प्रकोप ज्यादा दर्ज हो रहा है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। ऐसा नहीं है कि कीट नियंत्रण के लिए प्रभावी उपचार नहीं है। लेकिन, उपचार के बाद किसानों को जहर खत्म होने का इंतजार करना होता है।  वहीं, डर यह भी है कि यदि कोई खुल्ला पशु खेत में घुसकर चारा खा जाएं तो उसकी जान के लेने के देने पड़ जाएं। इस कारण किसान फसल में कीटनाशी के उपयोग नहीं करते है।

स्पोडोप्टेरा लिटुरा कीट का प्रकोप

कृषि विज्ञान केन्द्र, डूंगरपुर के कीट वैज्ञानिक डॉ. बीएल रोत ने बताया कि रिजका फसल में स्पोडोप्टेरा लिटुरा कीट का प्रकोप होता है। इसे तम्बाकू कटवर्म के नाम से ही जानत है। इसके अलावा रिजका इल्ली, चना इल्ली सेमीलूपर कीट का प्रकोप भी इस फसल में होता है। इन कीटों के नियंत्रण के लिए किसान मेटासिस्टोक्स एक लीटर प्रति एक हजार लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव कर सकता है। लेकिन, छिडक़ाव के बाद दो सप्ताह तक पशुओ को यह चारा नहीं खिलाना होता है। अन्यथा, कीटनाशक के अवशेष पहले पशु, फिर दुग्ध के साथ मानव शरीर में प्रवेश कर जाते है।

यह करें किसान

उन्होने बताया कि रिजका फसल में कीटनाशी उपयोग से ज्यादा कीट नियंत्रण के लिए प्रभावी और कारगर उपाय है फैरोमेन ट्रेप। किसान प्रति एक एकड़ एक ट्रेप लगाकर कीटों को नियंत्रण कर सकते है। उन्होंने बताया कि ल्यूर की गंध से नर कीट आकर्षित होते है। इससे प्रजनन क्रिया बाधित हो जाती है। जो कीटों की आबादी रोकने में सहायक है। 


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