मटर फसल का तना मक्खी, माहू और फलीछेदक जैसे रोगों से करें बचाव
(सभी तस्वीरें- हलधर)मटर में समेकित कीट प्रबंधन
मटर की खेती हरी सब्जी और दलहन के लिए की जाती है। हरे मटर की खेती से किसानों को अच्छी आमदनी होती है। लेकिन, लीफमाइनर, तना मक्खी, माहू, फली छेदक और अमेरिकन बॉलवर्म जैसे कीट का प्रकोप फसल पर होने की स्थिति में किसान को होने वाली आमदनी की उल्टी गिनती शुरू हो जाती है। आमदनी के स्तर को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि खेत में कीट प्रकोप होने के साथ ही किसान नियंत्रण के उपाय करें।
प्रमुख कीट और उनके नियंत्रण के उपाय:
1.लीफमाइनर
डाईमिथोएट 30 ईसी 1 लीटर का 250 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
2.तना मक्खी
ऑक्सीडिमेतोन मिथाईल 25 ईसी 3 मिली प्रति लीटर (750 मिली/250 लीटर) पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
3.माहू
डाईमिथोएट 30 ईसी 1 लीटर 250 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
4.फल छेदक
फल बनने के समय इंडोक्साकार्ब 14.5 प्रतिशत एससी 0.5 मिली प्रति लीटर पानी में, अथवा फेनवेलेरेट 20 ईसी 0.25 मिली प्रति लीटर पानी में, अथवा ऐसीफेट 1.0 ग्राम प्रति लीटर पानी, अथवा स्पिनोसैड 4.5 एससी 0.2 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
5.अमेरिकन बॉलवर्म
क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी 5 लीटर अथवा ऐसीफेट 75 एस 2 किलो का 250 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।