गर्मियों में पशुओं को बीमारी से बचाएगा NOHM, संक्रमण से रहेगा पूरा फार्म सुरक्ष

नई दिल्ली 06-Jun-2026 01:06 PM

गर्मियों में पशुओं को बीमारी से बचाएगा NOHM, संक्रमण से रहेगा पूरा फार्म सुरक्ष

(सभी तस्वीरें- हलधर)

नई दिल्ली। गर्मी और बदलते मौसम के साथ पशुओं में संक्रमण और जूनोटिक (पशु से इंसान में फैलने वाली) बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पशुपालकों को सतर्क रहने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा नेशनल वन हेल्थ मिशन (NOHM) संचालित किया जा रहा है, जिसके तहत पशुओं और इंसानों दोनों की सेहत को सुरक्षित रखने पर जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जूनोटिक बीमारियां न केवल पशुओं की उत्पादकता को प्रभावित करती हैं, बल्कि पशुपालकों पर इलाज का अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी डालती हैं। ऐसे में वैज्ञानिक पशुपालन और बायो-सिक्योरिटी उपाय अपनाकर इन बीमारियों से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।

क्यों जरूरी है वन हेल्थ मिशन?

NOHM का उद्देश्य पशु, मानव और पर्यावरण स्वास्थ्य के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। कोरोना महामारी के बाद बायो-सिक्योरिटी की अहमियत और बढ़ गई है। मिशन के तहत पशुपालकों को फार्म प्रबंधन और संक्रमण नियंत्रण के आधुनिक तरीके अपनाने की सलाह दी जाती है।

पशुपालक जरूर अपनाएं ये सुरक्षा उपाय

  • पशु फार्म की मजबूत बाड़बंदी कराएं ताकि बाहरी जानवर अंदर न आ सकें।
  • फार्म परिसर के अंदर और बाहर नियमित रूप से कीटाणुनाशक दवा का छिड़काव करें।
  • फार्म पर हैंड सैनिटाइजर और डिसइन्फेक्टेंट की व्यवस्था रखें।
  • बाहर से आने वाले लोगों के जूते फार्म के बाहर उतरवाएं या उन्हें सैनिटाइज करें।
  • आगंतुकों के हाथ और कपड़ों को भी संक्रमणमुक्त करें।
  • जरूरत पड़ने पर पीपीई किट पहनाकर ही फार्म में प्रवेश दें।
  • नए खरीदे गए पशुओं को कम से कम 15 दिनों तक अलग रखें।
  • छोटे बच्चों, गर्भवती, बीमार, स्वस्थ और दूध देने वाले पशुओं के लिए अलग-अलग स्थान की व्यवस्था करें।
  • मौसम के अनुसार पशु शेड का प्रबंधन करें और साफ-सफाई बनाए रखें।
  • बरसात और गर्मी के मौसम में मच्छर, मक्खी और अन्य कीटों से पशुओं की विशेष सुरक्षा करें।

सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सतर्कता और वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन अपनाकर पशुपालक अपने पशुओं को कई गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं। इससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, उत्पादन बढ़ेगा और पशुपालकों की आय पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।


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