पृथ्वी दिवस विशेष: मिट्टी जांच से स्वस्थ होगी धरा, खेत होगा हरा-भरा
(सभी तस्वीरें- हलधर)मिट्टी की जांच से खेत के पोषक तत्वों, pH मान (अम्लीय/क्षारीय) और उर्वरक की आवश्यकता का पता चलता है, जिससे पैदावार बढ़ती है। फसल बुवाई से एक महीने पहले 6 इंच गहरा, 'V' आकार का नमूना (0.5 kg)लें और इसे छांव में सुखाकर नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र और प्रयोगशाला में 3 साल में एक बार जांच कराएं।
मिट्टी का नमूना लेने की सही विधि
खेत के 8-10 अलग-अलग कोनों से मिट्टी लें। फिर 'V'आकार का 6 इंच (15 सेमी) गहरा गड्ढा खोदें और खुरपी से एक तरफ की मिट्टी की पपड़ी निकालें और सभी नमूनों को मिलाकर 500 ग्राम मिट्टी छांव में सुखाकर साफ थैली में रखें।
नमूने पर लगाने वाली जानकारी:-
जांच के लाभ
अनावश्यक खाद के खर्चे से बचत और सही पोषण का ज्ञान होता है। मिट्टी के स्वास्थ्य के अनुसार सही फसल का चुनाव किया जा सकता है। मिट्टी के pH (अम्लीय या क्षारीय) के अनुसार सुधारक (जैसे जिप्सम या चूना) का प्रयोग करें। मिट्टी की जांच के बाद प्राप्त 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड' के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करें