गेहूं और जौ की फसल में दीमक पर ऐसे पाएं नियंत्रण
(सभी तस्वीरें- हलधर)किसान भाइयों कृषि कार्यों को समय पर करने और उन्नत कृषि विधियां अपनाने पर कृषि से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। समय पर कृषि क्रियाएं करने से रोग व कीटों का आक्रमण कम हो जाता है तथा इनसे होने वाली हानि को रोककर उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है। गेहूं और जौ की खड़ी फसल में दीमक का प्रकोप होने पर समय पर नियंत्रण करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह कीट पौधों की जड़ों और तनों को अंदर से नुकसान पहुंचाकर फसल को सूखा देता है और उत्पादन में भारी कमी कर सकता है। आज हम आपको गेहूं और जौ की फसल में दीमक प्रकोप पर नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक सलाह बता रहे हैं। नीचे बताए गए उपाय कर किसान भाई अपनी फसल को दीमक के प्रकोप से बचा सकते हैं।
लक्षण: दीमक के प्रकोप के लक्षणों में पौधों का अचानक पीला पड़ना, सूखना, पौधों का आसानी से उखड़ जाना तथा जड़ों और तनों के पास मिट्टी की सुरंग या मिट्टी की परत दिखाई देना शामिल है।
समस्या: गेहूं और जौ फसल में दीमक प्रकोप
समाधान: ऐसी स्थिति में नियंत्रण के लिए क्लोरपायरीफॉस 20 ई.सी. का उपयोग प्रभावी माना गया है। किसान 4 लीटर क्लोरपायरीफॉस 20 ई.सी. प्रति हेक्टेयर से सिंचाई के पानी के साथ खेत में प्रवाहित करें, ताकि दवा जड़ों के आसपास पहुंचकर दीमक को नष्ट कर सके। दवा का प्रयोग हल्की सिंचाई के साथ करना अधिक प्रभावी रहता है।
इसके अलावा, खेत में उचित नमी बनाए रखें। फसल अवशेषों को नष्ट करें और समय-समय पर खेत का निरीक्षण करते रहें, ताकि दीमक का प्रकोप प्रारंभिक अवस्था में ही नियंत्रित किया जा सके और फसल की उपज सुरक्षित रहे।
गेहूं और जौ की खड़ी फसल में दीमक के प्रकोप के लक्षण दिखाई देने पर क्लोरपायरीफॉस 20 ई.सी. 4 लीटर प्रति हैक्टेयर सिंचाई के पानी के साथ देवे।