गेहूं किसानों के लिए विशेष सलाह जारी, 15 मार्च तक करें ये काम
(सभी तस्वीरें- हलधर)भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल ने गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए 15 मार्च तक विशेष एडवाइजरी जारी की है। इस सलाह में किसानों को सिंचाई प्रबंधन, रतुआ रोग की निगरानी, ऐफिड (चूसक कीट) नियंत्रण और बढ़ती गर्मी से फसल की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
रतुआ रोग की नियमित निगरानी जरूरी
संस्थान ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसल में धारीदार (पीला), भूरा और काला रतुआ रोग की नियमित रूप से निगरानी करें। यदि खेत में रतुआ रोग के लक्षण दिखाई दें और इसकी पुष्टि हो जाए, तो तुरंत फफूंदनाशक का छिड़काव करना चाहिए ताकि रोग का फैलाव रोका जा सके।
प्रोपिकोनाजोल के छिड़काव की सलाह
विशेषज्ञों के अनुसार रतुआ रोग के नियंत्रण के लिए प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी का छिड़काव प्रभावी माना जाता है। इसके लिए एक लीटर पानी में एक मिलीलीटर रसायन मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। इस प्रकार 200 मिली फफूंदनाशक को 200 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ गेहूं की फसल पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। छिड़काव हमेशा साफ मौसम में करना चाहिए, जब बारिश, कोहरा या ओस न हो।
पकी हुई फसल की समय पर करें कटाई
संस्थान ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि जिन क्षेत्रों में गेहूं की फसल पक चुकी है, खासकर प्रायद्वीपीय क्षेत्रों या सीमित सिंचाई वाले इलाकों में, वहां कंबाइन रिपर मशीन से कटाई की जानी चाहिए। यदि कटाई हाथ से की जा रही हो, तो फसल को थ्रेसिंग से पहले उचित नमी तक अच्छी तरह सुखाना जरूरी है।
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