हरे चारे का हे बनाएं, सालभर पशुओं को मिलेगा पौष्टिक आहार
(सभी तस्वीरें- हलधर)राजस्थान के अधिकांश भूभाग में वार्षिक वर्षा दर बहुत कम है। ऐसे में वर्षा ऋतु के अलावा पशुओं को वर्षभर हरा चारा उपलब्ध करवाना चुनौतीपूर्ण कार्य है। देश में 45 प्रतिशत दाना मिश्रण, 36 प्रतिशत हरे चारे और 11 प्रतिशत सूखे चारे की कमी है। स्पष्टतया पशुपालक हरे चारे की कमी से जूझ रहे हैं, जिसके कारण पशुओं में मिनरल और विटामिन की कमी होने से पशु कमजोर और रोगग्रस्त हो जाता है। इस समस्या से बचने के लिए वर्षा ऋतु में हरे चारे और चारा फसलों की अधिकता होने पर उनका हे के रूप में संरक्षण और संग्रहण किया जा सकता है और वर्ष भर पशुओं को खिलाने में उपयोग किया जा सकता है। तुड़ी के बजाय हे में अधिक पोषक तत्व होते हैं और यह पशुओं को खाने में अधिक स्वादिष्ट लगता है।
हे: एक परिचय
सूखा हुआ चारा, जिसमें शुष्क पदार्थ लगभग 85-90 प्रतिशत, रंग हरा और पत्तियों की अधिक मात्रा हो उसे 'हे' कहते हैं। हे में नमी की मात्रा 12-14 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए। ताकि, इसको किण्वन और कवक संक्रमण से बचाया जाकर सुरक्षित भंडारित किया जा सके। हे स्वादिष्ट, स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है, जिसे वर्ष भर पशु चारे के रूप में प्रयोग में लिया जा सकता है।
उच्च गुणवत्ता वाले हे की विशेषताएं
उच्च गुणवत्ता वाले हे का निर्माण करने के लिए हरे चारे, घास अथवा चारा फसल को उसकी पुष्प अवस्था में काटा जाता है। जब उसमें अधिकतम पोषक तत्व उपस्थित होते हैं।
उच्च गुणवत्ता वाले हे में पत्तियों की मात्रा अधिक होती है। क्योंकि, पत्तियों में प्रोटीन व विटामिन और शक्तिदायक तत्व अधिक मात्रा में होते हैं।
हे का रंग हरा अथवा सुगन्धित, स्वादिष्ट, पौष्टिक और सुपाच्य होना चाहिए।
हे में नमी की मात्रा 12-14 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए।
हे में खरपतवार नहीं और अनावश्यक पदार्थों की मिलावट नहीं होनी चाहिए और भंडारण सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।
हे निर्माण के लिए उपयुक्त फसल चयन
हे निर्माण के लिए पतले तने वाली छरहरी और फलीदार फसलें उपयुक्त रहती हैं। क्योंकि, इनको सुखाने में कम समय लगता है। उदाहरणतः दुब घास, लेग्यून घास, जई, एम्पी चरी, रिजका, बरसीम, कासनी इत्यादि। मोटे तने की फसलों का भी हे बनाया जा सकता है। परन्तु उनको सुखाने के लिए पहले छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर रोलर के बीच कुचला जाता है।
हे के प्रकार
फलीदार हे: यह फलीदार पौधों से बनती है जैसे रिजका, बरसीम, कासनी इत्यादि। इसमें सुपाच्य प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। साथ ही, कैरोटीन, विटामिन डी, विटामिन ई और कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।
अफलीदार हे: यह घासों और अनाज फसलों से बनती है जैसे जई और जो इत्यादि। इसमें ऊर्जा की मात्रा अधिक होती है।
मिश्रित हे: यह फलीदार और अफलीदार पौधों को मिलाकर बनाई जाती है। इसका रासायनिक संगठन मिलाये गए पौधों के अनुपात पर निर्भर करता है।
फसल कटाई का समय
हरे चारे अथवा चारा फसल में जब दो तिहाई पुष्प अवस्था आ जाती है, उस समय हे निर्माण के लिए फसल की कटाई करना चाहिए। क्योंकि, इसमें अधिकतम पोषक तत्व उपस्थित होते हैं और उच्च गुणवत्ता वाले हे का निर्माण होता है।
हे निर्माण की विधियाँ
खेत में सुखाकर: यह विधि तब उपयोगी है, जब साफ मौसम हो और आगामी कुछ दिनों में बारिश की संभावना नहीं हो। इस विधि में हरे चारे अथवा चारा फसल को काटकर उसी जगह कुछ घंटे पड़ा रहने देते हैं। फिर, जब नमी की मात्रा कम हो जाती है, तब छोटे-छोटे बंडल बनाते जाते हैं। अब इन बंडलों को उलट-पलट कर इतना सुखाया जाता है कि नमी की मात्रा 12-14 फीसदी हो जाये।
हरे चारे को लटकाकर सुखाकर: साफ मौसम में हरे चारे को लटका कर सुखाया जाता है। नमी की मात्रा जल्दी कम करने के लिए विषम तरीके अपनाये जाते हैं।
त्रिपाद पर सुखाना: इस विधि में लोहे के तीन पोल होते हैं, जिन पर चारे को सुखाया जाता है।
प्रक्षेत्र की तारबंदी पर सुखाना: तारबंदी वाले पोलों के तारों पर ही चारे को सुखा दिया जाता है। समय-समय पर चारे को पलटा जाता है। ताकि, हवा के अधिक संचरण से चारा जल्दी सूख जाये।
रैक पर सुखाना: इस विधि के अंतर्गत खेत के सबसे ऊंचे स्थान पर लोहे के सरियों का क्रॉस बनाकर उस पर चारा सुखाया जाता है।
हे निर्माण की आधुनिक विधियां: जब भी मौसम अनुकूल न हो तब हरे चारे और चारा फसलों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। फिर इन विधियों से सुखाया जाता है।
विद्युत द्वारा सुखाना: इस विधि में कटे हुए हरे चारे पर गर्म हवा तब तक प्रवाहित करते हैं जब तक कि नमी की मात्रा तक न रह जाये। इसके अतिरिक्त अधिक तापमान वाले गर्म कमरे में भी हरे चारे को सुखाया जा सकता है।
छत के नीचे सुखाना: इस विधि में हरे चारे के छोटे-छोटे टुकड़ों की फर्श प्लास्टिक अथवा तिरपाल पर पतली परत बनाकर सुखाया जाता है। यह विधि सस्ती है, परन्तु समय अधिक लगता है।
हे का संग्रहण
हे का संग्रहण किसी ऊंचे स्थान पर पानी के बहाव से दूर छायादार और सूखे स्थान पर किया जाना चाहिए। अधिक मात्रा में हे संग्रहण हेतु मशीनों से बड़े-बड़े बंडल भी बनाये जा सकते हैं। हे में नमी की मात्रा 12-14 फीसदी से कम रखकर इसको किण्वन और कवक संक्रमण से बचाया जा सकता है। आग से भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इस प्रकार के हे के रूप में सुपाच्य, स्वादिष्ट और पौष्टिक सूखा हरा चारा पशुओं को वर्ष भर उपलब्ध करवा कर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
डॉ. राजेश मेहरा, राजूवास, बीकाने