पशुपालकों के लिए आई खुशखबरी, केंद्रीय मंत्री ने कही ये बात
(सभी तस्वीरें- हलधर)केंद्र सरकार की ओर से राजस्थान के पशुपालकों के लिए अच्छी खबर आई है। केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाने का संकेत दे दिया है। सरकार मरुस्थलीय क्षेत्रों में ऊंट पालन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में तैयारी कर रही है। दरअसल, केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने जयपुर में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश में ऊंटनी के दूध से पाउडर बनाने वाले प्लांट की स्थापना पर विचार करने का आश्वासन दिया है। केंद्र सरकार का यह कदम राजस्थान के लाखों पशुपालकों, विशेषकर ऊंट पालन करने वालों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है। आपको बता दें कि मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय की परामर्शदात्री संसदीय समिति की इस बैठक में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह मुख्य अतिथि थे।
ऊंटनी दूध पाउडर पर शीघ्र निर्णय लेगा केंद्र
केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री सिंह ने केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि ऊंट पालन और डेयरी क्षेत्र के सतत विकास के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऊंटनी दूध पाउडर प्लांट लगाने के प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने ऊंटों को राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए पशुपालकों के हितों को प्राथमिकता देने का भरोसा दिलाया। मंत्री ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्तावों पर अतिशीघ्र कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया।
मंत्री ने ऊंट पालकों से किया सीधा संवाद
इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल और जॉर्ज कुरियन ने भी सक्रिय रूप से भागीदारी निभाई। उन्होंने जैसलमेर जिले के लगभग 150 प्रमुख ऊंट पालकों से सीधा संवाद किया। साथ ही उनकी समस्याओं, चुनौतियों एवं सुझावों को भी सुना। ऊंट पालकों ने ऊंट नस्ल संरक्षण, ऊंट आधारित उत्पादों के विपणन, डेयरी उद्योग से जुड़ी पहलों और पशुधन विकास पर विस्तार से चर्चा की। इस पर दोनों मंत्रियों ने सुझावों को नीति निर्माण में शामिल करने का आश्वासन दिया।
प्रदेश के पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने बैठक को संबोधित करते हुए केंद्र से व्यापक सहयोग की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए पशुपालन गतिविधियों से जोड़ना आवश्यक है। राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और पशुपालन को बढ़ावा दे रही है। इस अवसर पर डेयरी विकास की विभिन्न योजनाओं पर आधारित एक पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।