ओलावृष्टि के बाद कड़ाके की सर्दी पाले का बड़ा खतरा

नई दिल्ली 13-Jan-2026 03:34 PM

ओलावृष्टि के बाद कड़ाके की सर्दी पाले का बड़ा खतरा

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। प्रदेश के कई जिलों में रात का पारा लुढक़ने के साथ ही फसलों पर बर्फ की चादर उकरने लगी है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि पौधों पर बर्फ जमने से नुकसान की आंशका तीव्र हो गई है। गौरतलब है कि प्रदेश के आधा दर्जन करीब जिलों मेें हुई मावठ और ओलावृष्टि के बाद से सर्दी की चुभन तेज हो गई है। इससे दिन में भी सर्दी का अहसास तेज हो गया है। साथ ही, रबी फसलों पर पाला गिरने की संभावना भी नजर आने लगी है। गौरतलब है कि माउंट आबू के साथ-साथ फ तेहपुर में पारा जमाव बिंदु के करीब दर्ज हो चुका है। हालांकि, बीते दिनों पौधों पर जमी बर्फ से नुकसान के समाचार फिलहाल नहीं है।  किसानों का कहना है कि सर्दी का आलम यही रहा तो फसल उत्पादन में नुकसान उठाना पड़ेगा। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले एक सप्ताह से पड़ रही सर्दी और तापमान में निरंतर गिरावट का असर रबी की फसल पर पडने की संभावना है। हालांकि, तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। इसलिए औसत तापमान रबी फसलों के लिए अनुकूल बना हुआ है। उधर, रबी फसलों की बुवाई लक्ष्य के करीब पहुंच चुकी है।

दिन में भी धूजणी

उत्तरी हवाओं का असर ज्यादा होने, कोहरे की घणी चादर और मौसम शुष्क रहने के चलते दिन में भी कंपकंपी छूट रही है। सुबह और शाम के समय ठंड का असर अधिक रहने से आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सडक़ों पर आवाजाही कम नजर आ रही है, वहीं लोग अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा लेने को मजबूर हैं। गौरतलब है कि अलवर जिले के सोडावास और आसपास के गांवों में ओलावृष्टि हुई। वही, बीकानेर, झुंझनूं, जयपुर संभाग में हल्की मावठ से मौसम में अचानक ठंडक बढ़ गई।

मौसम रहेगा शुष्क

मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार आगामी एक सप्ताह तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्यत: शुष्क रहने की संभावना है। हालांकि पश्चिमी, उत्तरी और पूर्वी राजस्थान के कुछ भागों में अगले दो से तीन दिनों तक घना कोहरा और शीतलहर का असर बना रह सकता है। उत्तर राजस्थान में न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट होने की संभावना है, जिससे ठंड और बढ़ सकती है।

कृषि विभाग अलर्ट मोड पर

उधर, कृषि विभाग ने मौसम की उठापटक को देखते हुए सभी कृषि पर्यवेक्षकों को निर्देशित किया है कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को पाले से फसल बचाने के तकनीकी उपायों की जानकारी दें। गौतरलब है कि पाले के प्रभाव से पौधों की पत्तियां और फूल झुलसकर झड़ जाते हैं। वहीं, अधपके फल सिकुड़ जाते हैं और फलियों और बालियों में दाने नहीं बन पाते। विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि जब भी पाला पडऩे की संभावना हो, फसलों में हल्की सिंचाई जरूर करें। नमीयुक्त जमीन में गर्मी देर तक रहती है। इससे तापमान शून्य से नीचे नहीं गिरता। छोटे पौधों और सब्जियों को पाले से बचाने के लिए उन्हें टाट, पॉलीथिन अथवा भूसे से ढंक दें। उत्तर-पश्चिम की तरफ से आने वाली ठंडी हवा को रोकने के लिए खेत की मेड़ों पर टाटियां बांधें।

पशुपालन पर भी असर

केवीके भीलवाड़ा के डॉ. सीएम यादव ने बताया कि सर्दी की वजह से पशुओं ने चारा-पानी कम कर दिया है। इससे दुधारू पशुओं का दूध कम होने लगा है। पशुओं के नाक और मुंह से लार गिरने लगी है। विभाग के अनुसार जुकाम बढऩे से निमोनिया और बुखार आदि बीमारी भी हो सकती है।

ठंड से गेहूं और चना को फायदा

मौसम साफ होते ही पारा गिरने से पाला पडऩे के आसार नहीं है। तेज ठंड से गेहूं व चना फसल को फायदा होगा। कृषि विशेषज्ञों ने बताया ठंड जितनी तेज पड़ेगी, गेहूं और चना फसल उत्पादन उतना अच्छा होगा। पाला पडऩे के आसार कम हैं। तापमान कम होने पर सब्जियों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। आलू, बैगन और अरहर को नुकसान की आशंका है। ऐसे में सब्जी उत्पादक किसान को लगातार निगरानी की जरूरत है।


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