खाद आपूर्ति पर विधानसभा में चर्चा, कृषि मंत्री किरोड़ी ने दिए जवाब

नई दिल्ली 06-Mar-2026 12:51 PM

खाद आपूर्ति पर विधानसभा में चर्चा, कृषि मंत्री किरोड़ी ने दिए जवाब

(सभी तस्वीरें- हलधर)

राजस्थान विधानसभा में भरतपुर और कोटा संभाग में खाद आपूर्ति को लेकर सवाल उठे। विधायक ललित मीणा के प्रश्न के जवाब में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने बताया कि दोनों संभागों में कुल 30,600 मीट्रिक टन डीएपी (DAP) की उपलब्धता रही है। मंत्री ने बताया कि बारां और झालावाड़ जिलों में जबरन अटैचमेंट की शिकायतों के आधार पर कुछ विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं, जबकि अन्य सीमावर्ती जिलों से ऐसी शिकायतें नहीं मिली हैं। उर्वरक तस्करी से संबंधित चार मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है।

जबरन अटैचमेंट और तस्करी पर सख्ती, 765 को नोटिस

कृषि मंत्री डॉ. मीणा ने बताया कि पिछले छह महीनों में भरतपुर और कोटा संभाग में 1373 औचक निरीक्षण किए गए। उल्लंघन पाए जाने पर 765 विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और 300 से अधिक विक्रेताओं की उर्वरक बिक्री पर रोक लगाई गई। इसके अलावा 744 उर्वरक निरीक्षकों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।

पूरक प्रश्न में विधायक ललित मीणा ने कहा कि बारां और झालावाड़ में 16 विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त हुए हैं और कई जगह किसानों को जबरन अटैचमेंट लेकर ही खाद दी जाती है। इस पर कृषि मंत्री डॉ. मीणा ने कहा कि जबरन अटैचमेंट से किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ता है और इसे रोकने के लिए विभाग लगातार निर्देश जारी कर रहा है। राज्य स्तर पर फर्टिलाइजर टास्क फोर्स और सख्त निगरानी समिति का गठन किया गया है।

मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि बड़ी कंपनियों द्वारा अटैचमेंट थोपने की शिकायतें मिली हैं। इसे रोकने के लिए निरीक्षकों को सख्ती के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि वे स्वयं सूरतगढ़ जाकर कार्रवाई कर चुके हैं और यदि कोई कंपनी नियमों का पालन नहीं करती तो उसका लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। तस्करी रोकने के लिए पुलिस के सहयोग से चेक पोस्ट भी स्थापित किए जाएंगे।

उपनेता प्रतिपक्ष ने यूरिया की कमी को लेकर सवाल उठाया

वहीं, विधानसभा की कार्यवाही के दौरान उपनेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा ने यूरिया की कमी को लेकर सवाल उठाया। इस पर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि इस बार जमीन में नमी अधिक रहने और सरसों व गेहूं की बुवाई के बीच अंतर कम होने के कारण अचानक मांग बढ़ी थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए किसानों को पर्ची प्रणाली के माध्यम से उर्वरक वितरित किया गया।

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