प्रदेश के अनेक जिलों में गाजर की खेती किसान करते है। उत्पादित होने वाली गाजर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब सहित दूसरे राज्यों में भेजी जाती है। मांग होने से गाजर के भाव भी किसान को दूसरी फसलों से अधिक मिलते है। परंतु कीट-रोग का समय पर नियंत्रण नहीं किए जाने से फसल में नुकसान लगने का डर भी रहता है। गौरतलब है कि गाजर का उपयोग सलाद, अचार और हलवा बनाने के लिये किया जाता है। गाजर का रस कैरोटीन का महत्वपूर्ण स्त्रोत है। गाजर को निरोगी बनाने के उपाय आलेख में दिये गये है।
प्रमुख रोग
- सर्कोस्पोरा पर्ण अंगमारी : फसल में रोग के लक्षण दिखाई देने पर मैंकोजेब, 25 किग्रा अथवा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 किग्रा. का एक हजार लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हैक्टयर की दर से छिडकाव करें।
- स्क्लेरोटीनिया विगलन : कार्बनडाजिम 50 डब्ल्यूपी. 1 किग्रा एक हजार लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हैक्टयर की दर से एक पखवाडे के अंतराल पर 3-4 छिड़काव करें।
- चूर्ण रोग : चूर्ण रोग के लक्षण आने पर कैराथेन 50 मिली प्रति 100 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
कीट प्रकोप
- गाजर की सुरसुरी : कीट की रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 1 मिली प्रति तीन लीटर पानी अथवा डाइमिथोएट 30 ईसी 2 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल तैयार करके छिड़काव करें।
- जंग मक्खी : नियंत्रण के लिए क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी का 2.5 लीटर प्रति हैक्टयर की दर से हल्की सिंचाई के साथ प्रयोग करें।