कृषि ग्रंथ कृषिपराशर:
(सभी तस्वीरें- हलधर)22. हलप्रसारणम्
हल का प्रसारण (हलारम्भ मुहूर्त)
कृष्णौ वृषौ हलश्लाघ्यौ रक्तौ वा कृष्णलोहितौ।
मुखपाशौ तयोर्लेप्यौ नवनीतैर्घृतेन वा।।
उत्तराभिमुखो भूत्वा क्षीरेणार्घ्यं निवेदयेत्।
सुवृष्टिं कुरु देवेश गृहाणार्घ्यं शचीपते।।
अर्थात् हल में जोतने के लिए काले लाल या काले लाल मिले हुए बैलों की जोड़ी उत्तम होती है। बैलों के मुख के दोनों बगल मक्खन या घी से लेप करना चाहिये। उत्तर की ओर मुंह करके दूध में सफेद फूल और दही डालकर अर्घ्य देना चाहिये। हे इन्द्र! यह अर्घ्य ग्रहण करो और अच्छी वर्षा करो। ऐसी प्रार्थना करे।