ईज ऑफ डूइंग बिजनेस है तो ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग क्यों नहीं |
(सभी तस्वीरें- हलधर)प्रख्यात कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने देश में खेती को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जब उद्योग और व्यापार को आसान बनाने के लिए “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” जैसी पहल की जा सकती है, तो किसानों के लिए “ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग” क्यों नहीं लागू किया जाता।
किसानों के लिए नीतियां क्यों जटिल?
देविंदर शर्मा का तर्क है कि किसानों को आज भी कई तरह की जटिल प्रक्रियाओं, बाजार की अनिश्चितता और लागत के दबाव का सामना करना पड़ता है। जबकि उद्योगों को सुविधाएं और राहत देने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं।
खेती में बढ़ती चुनौतियां
“ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग” की मांग तेज
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खेती को भी आसान बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, जैसे—
सरल ऋण प्रक्रिया
बेहतर बाजार व्यवस्था
तकनीकी सहायता ,तो कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ सकता है।
सरकार के लिए संकेत
देविंदर शर्मा के इस बयान के बाद कृषि क्षेत्र में एक नई बहस शुरू हो गई है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार किसानों के लिए भी “ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग” जैसी पहल लाएगी। देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले किसानों के लिए खेती को आसान बनाना समय की मांग बन चुकी है।