पर्यावरण बचाने का सबसे आसान तरीका क्या आप जानते हैं खेती का ये मॉडल?
(सभी तस्वीरें- हलधर)विश्व पर्यावरण दिवस विशेष
5 जून को पूरी दुनिया विश्व पर्यावरण दिवस मना रही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पर्यावरण को बचाने की सबसे बड़ी ताकत खेतों में छिपी है? अगर किसान जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाएं तो न सिर्फ मिट्टी की सेहत सुधरेगी, बल्कि जल, वायु और पूरे पर्यावरण को भी नया जीवन मिल सकता है।
खेतों से शुरू होगी हरियाली की असली क्रांति
पर्यावरण संरक्षण की बात आते ही सबसे पहले पेड़ लगाने और प्रदूषण कम करने की चर्चा होती है। लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खेती के तरीकों में बदलाव भी पर्यावरण बचाने का बड़ा हथियार बन सकता है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने से पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव काफी घट सकता है।
क्यों खास है प्राकृतिक खेती?
प्राकृतिक खेती में रासायनिक उर्वरकों और जहरीले कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसके बजाय गोबर, गौमूत्र, जीवामृत और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है।
प्राकृतिक खेती के बड़े फायदे
जैविक खेती: मिट्टी के लिए संजीवनी
जैविक खेती में केंचुआ खाद, गोबर खाद, फसल अवशेष और अन्य जैविक संसाधनों का उपयोग किया जाता है। इससे मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ता है और जमीन की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार रासायनिक खेती से कमजोर होती मिट्टी को फिर से स्वस्थ बनाने में जैविक खेती अहम भूमिका निभा सकती है।
किसानों को क्या होगा फायदा?
आज जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, अनियमित बारिश और सूखे जैसी समस्याएं किसानों के सामने बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। ऐसे में जैविक और प्राकृतिक खेती केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत बनती जा रही है।
क्यों मनाया जाता है विश्व पर्यावरण दिवस?
विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1973 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और प्रकृति की रक्षा के लिए प्रेरित करना है।
क्या है 2026 की थीम?
इस वर्ष की थीम जलवायु परिवर्तन के खिलाफ तुरंत और प्रभावी कदम उठाने का संदेश देती है। इसका फोकस कार्बन उत्सर्जन कम करने, स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने पर है।