सरसों की उपज 20–30% बढ़ाने का वैज्ञानिक तरीका, बस यह छिड़काव करें

नई दिल्ली 05-Jan-2026 01:26 PM

सरसों की उपज 20–30% बढ़ाने का वैज्ञानिक तरीका, बस यह छिड़काव करें

(सभी तस्वीरें- हलधर)

थायोयूरिया एक जैव रसायन है। विभिन्न स्तरों पर किए गये अनुसंधानों और परिक्षणों से यह पाया गया है कि थायोयूरिया जैव रसायन के प्रयोग से सरसों फसल की उपज को बढाया जा सकता है। थायोयूरिया में करीब 42 प्रतिशत गंधक एवं 36 प्रतिशत नत्रजन होती है।  

क्या है थायोयूरिया

थायोयूरिया जैव नियामक एक सल्फर हाइड्रिला युक्त रसायन है ।  इसके प्रयोग से पौधों के अन्दर सल्फर हाइड्रिला समूह की उपलब्धता बढने से पौधों में सूक्रोज ट्रान्सपोर्ट प्रोटीन अधिक सक्रिय हो जाता है । पौधों में दानों का भराव तीव्रता से होता है। यही कारण है कि थायोयूरिया जैव नियामक से उपचारित सरसों के पौधों में पुष्पक्रम के अन्तिम छोर पर स्थित फलियों में भी दाने बन जाते है। जबकि, अनुपचारित पौधों में ऐसी फलियां या तो झड़ जाती है अथवा अक्सर खाली रह जाती है । इस तरह थायोयूरिया के प्रयोग से पौधों मे फ लियों की संख्या में वृद्वि होती है जो अन्तत: फ सल की उपज को बढाने में निर्णायक सिद्व होती है। 

यह होता है लाभ

सरसों की फसल में थायोयूरिया के छिड़काव से फसल को पाले की क्षति से भी बचाया जा सकता है। इसका मुख्य कारण थायोयूरिया में निहित गन्धक का सक्रिय रूप सल्फाहाईड्रिल समुह ही है । थायोयूरिया उपचारित सरसों के पौधें में चेंपा का आक्रमण भी कम देखा गया है। इसी तरह थायोयूरिया का छिडकाव एक प्रभावी सस्य जैव तकनीक के रूप में सरसों की उत्पादकता  को बढाने में अत्यन्त कारगर भूमिका निभा सकता है। 

प्रारम्भिक परीक्षणों से यह ज्ञात हुआ है कि पानी की कमी में भी थायोयूरिया जैव नियामक के प्रयोग से पौधों को राहत दी जा सकती हैए फलत: फसल की उपज में बढोतरी होती है। अत: थायोयूरिया जैव नियामक के प्रयोग से सीमित सिंचाई से उगाई जाने वाली सरसों के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि प्राप्त की जा सकती है। 

डॉ. अशोक कुमार शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक

भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान भरतपु


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