सरसों में चेंपा कीट नियंत्रण: पहचान, नुकसान और प्रभावी प्रबंधन उपाय
(सभी तस्वीरें- हलधर)यह राई-सरसों का प्रमुख कीट है। स्थानीय भाषा में इसे चेंपा, माँहू, मोयला, लाही, तेला आदि नामों से जाना जाता है। चेंपा अथवा माँहू फ सल पर दो अवस्था में पाया जाता है, पहला पंख रहित और दूसरा पंख सहित। पंख रहित प्रौढ़ 2 मिमी लम्बे कोमल शरीर वाले और हल्के हरे रंग के होते हैं। पंख वाले प्रौढ़ पीले उदर वाले पंख पारदर्शी होते है, शिशु पंख रहित अवस्था के समान होते हैं। पर आकार में छोटे होते हैं। दो नलीकानुमा संरचनायें (कोर्निकल्स) उदर के अंतिम भाग में उपस्थित होती है।
हानि के लक्षण
प्राय: दिसम्बर के अंत में यह कीट प्रकट होते हैं और मार्च के अंत तक सक्रिय रहते हैं । इस कीट के शिशु और प्रौढ़ पौधों के विभिन्न भागों से रस चूसकर नुकसान पहॅुचाते हैं, कीट समूह में रहते हैं और तीव्र गति से वंशवृद्धि करते है, धीरे-धीरे पूरे पौधे को ढक लेते हैं। उग्र प्रकोप के समय पौधा सूख जाता है और फलियॉ नहीं लगती हैं। यह कीट फसल को 95 प्रतिशत तक नुकसान पहुॅचाते हैं। तेल की मात्रा में 10 प्रतिशत तक की कमी हो सकती हैं। यह कीट मधुस्त्राव निकालते हैं जिससे पौधे पर काले कवक का आक्रमण हो जाता है ।

एकीकृत कीट प्रबंधन
डॉ. अशोक कुमार शर्मा, आईआईआरएमआर, सेवर, भरतपुर