सरसों में चेंपा कीट नियंत्रण: पहचान, नुकसान और प्रभावी प्रबंधन उपाय

नई दिल्ली 01-Jan-2026 01:41 PM

सरसों में चेंपा कीट नियंत्रण: पहचान, नुकसान और प्रभावी प्रबंधन उपाय

(सभी तस्वीरें- हलधर)

यह राई-सरसों का प्रमुख कीट है।  स्थानीय भाषा में इसे चेंपा, माँहू, मोयला, लाही, तेला आदि नामों से जाना जाता है। चेंपा अथवा माँहू फ सल पर दो अवस्था में पाया जाता है, पहला पंख रहित और दूसरा पंख सहित। पंख रहित प्रौढ़ 2 मिमी लम्बे कोमल शरीर वाले और हल्के हरे रंग के होते हैं। पंख वाले प्रौढ़ पीले उदर वाले पंख पारदर्शी होते है, शिशु पंख रहित अवस्था के समान होते हैं। पर आकार में छोटे होते हैं। दो नलीकानुमा संरचनायें (कोर्निकल्स) उदर के अंतिम भाग में उपस्थित होती है। 

हानि के लक्षण

प्राय: दिसम्बर के अंत में यह कीट प्रकट होते हैं और मार्च के अंत तक सक्रिय रहते हैं । इस कीट के शिशु और प्रौढ़ पौधों के विभिन्न भागों से रस चूसकर नुकसान पहॅुचाते हैं, कीट समूह में रहते हैं और तीव्र गति से वंशवृद्धि करते है, धीरे-धीरे पूरे पौधे को ढक लेते हैं। उग्र प्रकोप के समय पौधा सूख जाता है और फलियॉ नहीं लगती हैं। यह कीट फसल को 95 प्रतिशत तक नुकसान पहुॅचाते हैं।  तेल की मात्रा में 10 प्रतिशत तक की कमी हो सकती हैं। यह कीट मधुस्त्राव निकालते हैं जिससे पौधे पर काले कवक का आक्रमण हो जाता है । 

एकीकृत कीट प्रबंधन 

  • उर्वरकों की संतुलित मात्रा ही काम में लेवें। केवल नत्रजन उर्वरकों का प्रयोग फसल को चेंपा से अधिक सुग्राही बनाता है।
  • नियमित रूप  से खेतों का भ्रमण करना चाहिये जैसा कि चेंपा फसल की बाहरी पंक्तियों पर आक्रमण करता है, उसके बाद खेतों में अन्दर गमन करता है । फसल के समय 10 दिन के अन्तराल पर 2-3 बाद ग्रसित टहनियों को तोड़कर नष्ट कर देने से चेंपा के दुबारा गुणन को रोकने में लाभदायक है । 
  • जब फसल में कम से कम 10 प्रतिशत पौधों की संख्या चेंपा से ग्रसित हो और 26-28 चेंपा प्रति पौधा हो, तो  डाइमिथोयट 30 प्रतिशत 1 लीटर प्रति 600-800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैंक्टयर की दर से छिड़काव करें। 15 दिन के अंतराल से पुन: छिडकाव करना चाहिए। छिड़काव दोपहर के समय करना चाहिये। ताकि परागण करने वाले कीटों को कीटनाशी के विषैले प्रभावों से बचाया जा सके। यदि प्राकृतिक शुत्रु जैसे लेडी बर्डविटिल (काक्सीनेला स्पीसीज), सिरफि ड (सिरफि स स्पीसीज), परजीव्याभ माहू पर्याप्त मात्रा में हो तो छिड़काव नहीं करना चाहिये । 

डॉ. अशोक कुमार शर्मा, आईआईआरएमआर, सेवर, भरतपुर


ट्रेंडिंग ख़बरें