फसल में कीड़े नहीं लगेंगे! नीम का यह देसी फार्मूला जरूर अपनाएं

नई दिल्ली 16-Jun-2026 03:13 PM

फसल में कीड़े नहीं लगेंगे! नीम का यह देसी फार्मूला जरूर अपनाएं

(सभी तस्वीरें- हलधर)

निम्बोली में प्रमुख रूप से उपयोगी रसायन अजाडिरेक्टिन होता है। यह रसायन ही नीम आधारित कीटनाशकों को तैयार करने का आधार है। कीट इसकी गंध से दूर भागते हैं। इसके छिड़काव से फसल में उपस्थित सुण्डी नुकसान पहुंचाना बंद कर देती है। मित्र कीटों पर इस रसायन के छिड़काव का विपरीत असर नहीं पड़ता है।

नीम पाउडर

पूर्ण रूप से सूखी हुई निम्बोली को हाथ की चक्की अथवा ओखली में डालकर मूसल की सहायता से बारीक अथवा दरदरी कूट लेवें, बहुत ज्यादा महीन कूटने की आवश्यकता नहीं होती है। अब यह बारीक पाउडर छिड़काव के लिए तैयार है। अनुसंधान से पता चला है कि नीम का 5 प्रतिशत चूर्ण शत्रु कीट को नष्ट करने के लिए कारगर है। अतः 5 किलो निम्बोली चूर्ण लेकर उसे 10 लीटर पानी में मिलाकर लगभग 15 मिनट तक अच्छी तरह मिलाकर 24 घण्टे के लिए रख देवें। दूसरे दिन एक बार फिर इसे अच्छी तरह हिलाये और बारीक कपड़े से छान लेवें। अब इस छने हुए पानी में और पानी की मात्रा मिलाकर कुल 100 लीटर पानी तैयार कर लेवें। अब नीम के 5 प्रतिशत अर्क का घोल छिड़काव के लिए तैयार है। छिड़काव करते समय इस घोल में थोड़ा सा गुड़ और 1 मिली. तरल साबुन अथवा एक ग्राम सर्फ प्रति लीटर पानी के हिसाब से मिलाये इससे घोल को पूरी तरह पत्ती पर फैलने में मदद मिलती है। गुड़ से घोल अच्छी तरह पौधों पर चिपक जाता है।

नीम का तेल

पूर्ण रूप से पकी और सूखी हुई निम्बोली का तेल निकाला जाता है। कोल्हू की सहायता से बाजार में तेल निकलवा सकते हैं। 3 लीटर तेल में 4 बीघा फसल पर छिड़काव किया जा सकता है। तेल पानी में घुलता नहीं है। अतः इसमें भी 1-2 मिली साबुन अथवा 1 से 2 ग्राम सर्फ प्रति लीटर के हिसाब से मिलाकर अच्छी तरह हिलाये। फिर, छिड़काव करें।

नीम की खली

तेल निकालने के बाद बची हुई नीम की खली भी बहुत उपयोगी होती है। इस खली को 2 क्विंटल प्रति बीघा के हिसाब से खेत में मिलाने से दीमक से छुटकारा मिलता है। साथ ही, मृदा में पनपने वाले शत्रु कीट भी नष्ट होते हैं। मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ती है


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