नींबू के पौधों में रोग? अभी अपनाएं ये कारगर उपाय

नई दिल्ली 10-Feb-2026 12:32 PM

नींबू के पौधों में रोग? अभी अपनाएं ये कारगर उपाय

(सभी तस्वीरें- हलधर)

नींबूवर्गीय पौधों में रोग नियंत्रण

नींबूवर्गीय फलों का हमारे आहार में बहुत महत्व है। इनमें विटामिन सी और खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इन फलों का उत्पादन बढ़ाने और गुणवत्ता सुधार के लिए समय-समय पर किसानों को पौध संरक्षण कार्य सम्पादित करने की आवश्यकता होती है। क्योंकि, कीट-रोग का समय रहते नियंत्रण करने से आर्थिक लाभ में बढ़ोत्तरी होती है।

रोग प्रबंधन

  1. नींबू का केंकर: रोगग्रस्त पत्तियों और टहनियों को काट कर जला देना चाहिए। रोपण हेतु नये बगीचे में सदैव रोग रहित नर्सरी के पौधे ही प्रयोग करें। रोपण से पूर्व पौधों पर बोर्डो मिश्रण 4:4:50 अथवा ब्लाईटोक्स 0.3 प्रतिशत का छिड़काव करें। रोग के प्रकोप को रोकने हेतु कटाई-छंटाई के बाद बोर्डो मिश्रण 4:4:50 अथवा स्ट्रेप्टोसायक्लिन 250 मिली अथवा बाविस्टिन एक ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का 20 दिन के अन्तराल पर फरवरी और मार्च में छिड़काव करें। अथवा स्ट्रेप्टोसायक्लिन 250 मिली और ब्लाईटोक्स 3 ग्राम का प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर रोग दिखाई देते ही 20 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करें।
  2. गोंदाती रोग: रोगग्रस्त छाल को हटाकर ब्लाईटोक्स अथवा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का लेप कर दें। साथ ही, 0.3 प्रतिशत अथवा रिडोमिल एमजेड के 0.2 प्रतिशत प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर पखवाड़े (15 दिन) के अंतराल पर 4-5 छिड़काव करें। इसके अलावा बगीचे की देखभाल, जल निकास, धूप और हवा का भी ध्यान रखें।
  3. सूखा रोग: सूखी टहनियों को काटकर जला दें। नई पत्तियां आने से ठीक पहले अथवा उन्हीं दिनों में पेड़ों पर बोर्डो मिश्रण 4:4:50 अथवा 0.3 प्रतिशत कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करें।
  4. विदर टिप अथवा डाई बैक: रोगी भाग की छंटाई के बाद कॉपर ऑक्सीक्लोराइड अथवा ब्लाईटोक्स 3 ग्राम अथवा मेन्कोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल वर्षा ऋतु में 15 और सर्दियों में 20 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें। इसके अलावा साल में दो बार (फरवरी और अप्रैल) में सूक्ष्म तत्वों का छिड़काव करना चाहिए।
  5. मूल ग्रंथि रोग: इस रोग की रोकथाम हेतु कार्बोफ्यूरोन 3 जी 20 ग्राम प्रति पेड़ की दर से प्रयोग करें।


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