नींबू वर्गीय फलों मे किन्नू संतरा अपने विशिष्ट स्वाद और रंग के कारण पूरे देश में काफी लोकप्रिय है। इसका फल गोल, मध्यम और चपटापन लिये हुए नांरगी रंग का होता है। फल का वजन 125 से 200 ग्राम तक होता है। पकने पर गूदा नारंगी, पीला तथा रस की मात्रा 40 से 45 प्रतिशत होती है। इसकी सुगन्ध मनमोहक, घुलनशील लवण 9 से 15 प्रतिशत, अम्लता 0.75 से 1.20 प्रतिशत तक होती है। इसका कुल रूटेसी तथा वश सिट्रस है। राजस्थान में श्रीगंगानगर जिला इसकी खेती के लिए प्रसिद्ध है। यह विटामिन सी, ए, बी और खनिज लवणों का प्रचुर स्त्रोत होता है।
प्रमुख कीट
- नींबू की तितली : लटों की संख्या अधिक नहीं हो तो लटों को पेड़ों से चुनकर मिट्टी के तेल मिले पानी से डालकर मार देना चाहिए। क्यूनालफॉस 1.5 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
- लीफ माइनर, सिट्रस सिल्ला : डाईमिथोएट 2 मिली. प्रति लीटर अथवा इमिडाक्लोप्रिड 1 मिली प्रति 3 लीटर पानी में घोल तैयार करके छिड़काव करें।
- मूल ग्रन्थी : कार्बोफ्यूरान 3 जी 20 ग्राम प्रति पेड़ की दर से प्रयोग करना चाहिए।
रोग नियंत्रण
- सिट्रस केंकर : बोर्डो मिश्रण (4:4: 50) कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 2 ग्राम प्रति लीटर अथवा स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 6 ग्राम प्रति 40 लीटर पानी में घोल बनाकर बीस दिन के अन्तर पर छिड़काव करें।
- गमोसिस (गोदाति रोग) : रोगग्रस्त छाल खुरचने के बाद रिडोमिल 2 ग्राम और अलसी का तेल 1 लीटर को अच्छी प्रकार मिलाकर अथवा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 2 ग्राम प्रति लीटर के घोल का लेप कर दीजिए। कॉपर ऑक्सीक्लोराइड अथवा रिडोमिल 2 ग्राम प्रति लीटर घोल के चार-पांच छिड़काव 15 दिन के अन्तर पर करें।
- डाई बैक : रोगग्रस्त भाग की कटाई के बाद कॉपर आक्सी क्लोराइड 2 ग्राम प्रति लीटर और स्ट्रेप्टोसाईक्लिन 6 ग्राम प्रति 40 लीटर पानी मे घोल बनाकर सर्दियों में 20 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करें।
- फलों का गिरना: 20 पीपीएम 2, 4 डी $ 0.5 प्रतिशत जिंक सल्फेट का छिड़काव फल लगने के बाद करना चाहिए। प्लेनोफिक्स हारमोन्स एक मिलीलीटर प्रति 4 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से भी फलों का गिरना रूकता है।