कम लागत में किसान करें मसूर की खेती, मिलेंगे अनगिनत फायदे

नई दिल्ली 11-Apr-2026 05:32 PM

कम लागत में किसान करें मसूर की खेती, मिलेंगे अनगिनत फायदे

(सभी तस्वीरें- हलधर)

रबी सीजन में उगाई जाने वाली मसूर फायदेमंद दलहनी फसल मानी जाती है। कम लगात, कम पानी और बाजार में अच्छी मांग की वजह से देश के कई राज्यों में किसान मसूर की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों की माने तो अगर किसान सही समय पर बुवाई और वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो मसूर की फसल से अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है।

मसूर की खेती फसल के बारे में...

मसूर की खेती के लिए शुद्ध और ठंडी जलवायु अच्छी मानी जाती है। इसकी बुवाई आमतौर पर अक्टूबर से नवंबर के बीच की जाती है, जबकि फसल लगभग 110 से 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। मसूर के पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान अनुकूल माना जाता है।

मसूर की खेती के लिए उपयुक्त मिट्‌टी-

मसूर की खेती लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी पैदावार के लिए दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है। खेत में जाल का उपयोग अच्छा होना चहिए। 

मसूर की खेती से पैदावार और कमाई-

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से मसूर की खेती करें तो प्रति हेक्टेयर 12 से 15 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। बाजार में मसूर दाल की अच्छी मांग होने की वजह से किसानों को इसका बेहतर दाम भी मिल जाता है। इसी वजह से मसूर की खेती को रबी सीजन में किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलों में गिना जाता है।

मसूर की खेती में काम आने वाले इम्प्लीमेंट्स

मसूर की खेती के लिए कई कृषि यंत्र उपयोगी होते हैं, जो खेती को आसान और समय बचाने वाला बनाते हैं। खेत की तैयारी के लिए हल और रोटावेटर का इस्तेमाल किया जाता है। बुवाई के लिए सीड ड्रिल मशीन सबसे बेहतर मानी जाती है, जिससे बीज सही गहराई पर जाता है। खरपतवार नियंत्रण के लिए वीडर या कल्टीवेटर का उपयोग किया जा सकता है। इन उपकरणों से लागत कम होती है और उत्पादन बेहतर होता है।


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