हाइड्रोपोनिक हरा चारा उत्पादन कैसे करें पूरी जानकारी हिंदी में

नई दिल्ली 26-Dec-2025 05:30 PM

हाइड्रोपोनिक हरा चारा उत्पादन कैसे करें पूरी जानकारी हिंदी में

(सभी तस्वीरें- हलधर)

देश के दुग्ध उत्पादन में सालाना आधार पर 4.04 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। जबकि, वैश्विक औसत 2.2 प्रतिशत हैं। हरा चारा दुधारू पशुओं का मुख्य आहार है। हरे चारे के उपयोग से पशु के उत्पादन, स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता में वृद्धि होती है। वर्षभर हरे चारे की मांग को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक का विकास किया है, जिसे हाइड्रोपोनिक्स कहा जाता है। इस तकनीक से वर्षभर कम लागत पर हरे चारे का उत्पादन लिया जा सकता है। आपको बता दें कि पशुपोषण में हाइड्रोपोनिक्स चारे के उपयोग से दाना मिश्रण की मात्रा में कमी करके पशुपालन को लाभकारी बनाया जा सकता है। 

पशुपोषण में हरे चारे की लाभदायकता

हरा चारा पचने मेें आसान और स्वादिष्ट होता है। यह वानस्पतिक प्रोटीन का प्रमुख स्त्रोत है। यह घुलनशील और रेशेदार कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख स्त्रोत है। कैल्शियम और आयरन जैसे खनिज तत्वों का अच्छा स्त्रोत है। हरे चारे में कैरोटिन (विटामिन-ए) और विटामिन 'ई' प्रचुर मात्रा में होते है । जो पशु की प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाते है। हरे चारे में जल बहुतायत में (लगभग 15-25 प्रतिशत) पाया जाता है।

परम्परागत खेती से हरा चारा उत्पादन की सीमाएं:-

अधिक भूमि की आवश्यकता होती है।  सिंचाई के लिए जल की कमी तथा उपलब्ध जल में लवणता होना। चारा उत्पादन में अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होना। चारा उत्पादन में समय का अधिक लगना (लगभग 40-50 दिन) वर्ष भर उच्च गुणवत्ता वाले हरे चारे का उत्पादन नहीं हो पाना। खाद- उर्वरक की आवश्यकता पडऩा। प्राकृतिक आपदा से होने वाला नुकसान। आवारा पशुओं से फसल सुरक्षा के लिये बाड़ और निगरानी की आवश्यकता होना।

हरा चारा उत्पादन तकनीक

जहां हरा चारा उत्पादन स्तर को उच्च बनाये रखने के लिये हाइड्रोपोनिक्स मशीन में नियंत्रित वातावरण (तापमान- आद्र्रता) में हरा चारा उत्पादन किया जाता है। हाइड्रोपोनिक्स मशीन में वर्ष भर हरा चारा नियंत्रित वातावरण में उगाया जा सकता है। राजस्थान में गर्मियों के दौरान तापमान अधिक रहने के कारण अप्रैल से सितम्बर माह में मक्का और सर्दियों में तापमान कम रहने के कारण अक्टूबर से मार्च में जौ फ सल बीजों से हरा चारा प्राप्त करना उपयुक्त रहता है। बीजों की गुणवत्ता का ध्यान रखना चाहिए। बीजो का अंकुरण 85' तक होना चाहिए। साथ ही, बीज कीट- रोग से भी मुक्त होना चाहिए। हाइड्रोपोनिक्स तकनीक द्वारा हरा चारा उत्पादन निम्न चरणों में करना चाहिए।

बीज दर-बीज की तैयारी

हाइड्रोपोनिक्स मशीन में जौ चारा फ सल के लिए बीज 30 किलो औरा मक्का के लिये 50 किलो की दर से काम में लिया जाता है। बीजों की निर्धारित मात्रा (जौ 750 ग्राम, मक्का 1.25 ग्राम प्रति टे्र) लेकर उन्हें साफ  पानी में धोना चाहिए। जिससे बीजों पर चिपकी मिट्टी, फंगस, कीटों के साथ ही खराब और क्षतिग्रस्त बीज भी अलग हो जाते है। बीजों को पानी से भिगोए रखने के साथ-साथ जैविक कीटनाशक, फफूंद-नाशक और वृद्धि कारक दवा का प्रयोग लाभकारी रहता है। जौ के बीज 10-12 घंटे और मक्का बीज को 18-20 घंटे पानी में भिगोये रखना चाहिए। इन्हें मशीन में नियंत्रित तापमान पर रखा जाता है।

बीजों को ट्रे में लगाना

अंकुरित बीजों को हाइड्रोपोनिक्स मशीन में प्रथम दिन टे्र में एकसार परत बना कर लगाना चाहिए। इस ट्रे से 7 दिन पश्चात हरा चारा प्राप्त कर लिया जाता है। इस प्रकार प्रत्येक दिन अंकुरित बीजों को ट्रे में लगाया जाता है।  सात दिन, जीवन चक्र के पश्चात इस ट्रे से चारा प्राप्त कर लिया जाता है। मशीन में तापमान जौ की फ सल के लिये (18-20 सेली.) और मक्का की फसल में (28-30 से.) आद्र्रता 70-80 प्रतिशत रखी जाती है।

पोषक तत्व घोल -पानी

हाइड्रोपोनिक्स हरा चारा उत्पादन में पोषक तत्व घोल की अनिवार्यता नहीं है। इसे साधारण पानी में भी उगाया जा सकता है। पोषक तत्व घोल के उपयोग से चारा उत्पादन में वृद्धि होती है। हाइड्रोपोनिक्स विधि से चारा उत्पादन में पानी की आवश्यकता परम्परागत विधि से चारा उत्पादन में लगे कुल जल का केवल 3-5 प्रतिशत ही होती है। इस मशीन में सिंचाई आवश्यकतानुसार स्वचलित प्रणाली द्वारा की जाती है। सिंचाई जल में पोषक तत्व युक्त घोल मिलाया जाता है। जिससे तैयार हो रही पौध को वृद्धि करने के लिये जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति बनी रहे। 

सूर्य का प्रकाश 

अंकुरित पौध प्रारंभ में बीजों में संग्रहित पोषक तत्व से अपना भोजन ग्रहण करता है। पौध 4-5 दिन तक पोषण बीजों से ही प्राप्त करता है। पौधों में हरित लवण क्रियाशील होने पर प्रकाश संश्लेषण की क्रिया शुरू हो जाती है। अत: पौधों को प्रकाश संश्लेषण सम्पन्न करने के लिये सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है। हाइड्रोपोनिक्स मशीन में सूर्य की रोशनी आने का प्रबंध होता है। 2 घंटे सवेरे और 2 घंटे दोपहर बाद मशीन मेें लगे गेट रोशनी के लिये खोल दिए जाते है। हाइड्रोपोनिक्स मशीन (ग्रीन हाउस) में साफ -सफ ाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। साफ -सफ ाई के अभाव में अथवा तापमान बढऩे से चारा फ सल में फफूंद लग सकती है। अत: स्वच्छ चारा उत्पादन के लिए विशेष सावधानियाँं रखनी चाहिए।

हाइड्रोपोनिक्स चारे की उपज और उसका रासायनिक संगठन

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से एक ट्रे में जौ बीज की 750 ग्राम मात्रा से 6-7 किलो और मक्का बीज की 1.25 किलो मात्रा से 8-10 किलो तक हरा चारा उत्पादन होता है। इस प्रकार प्रत्येक दिन 20-40 ट्रे यानि 240-480 किलो चारा बिना परेशानी के मशीन से उगाया जा सकता है। यह हरा चारा उत्पादन की एक सतत प्रक्रिया है।

हाइड्रोपोनिक्स हरे चारे में जड़, दाना और पत्तियाँं तीनों पशु आहार  में काम आती है। अत: परम्परागत हरे चारे की तुलना में इससे अधिक प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइडे्रट पाई जाती है। हाइड्रोपोनिक्स हरे चारे को सूखे चारे और दूसरे हरे चारे के साथ मिलाकर पशुओं को खिलाना लाभदायक रहता है।


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