मुर्गीपालन से लाखों कमाई! कम लागत में रोजगार का सुनहरा मौका
(सभी तस्वीरें- हलधर)
मुर्गीपालन किसानों की आर्थिकी को सुधारने का महत्वपूर्ण उद्योग है। कम समय और कम खर्च में किसान को अधिक आय इस व्यवसाय से प्राप्त होती है। देश के सकल राष्ट्रीय उत्पाद में करीब 33000 करोड रु. का योगदान कुक्कुटपालन का है। आगामी पांच वर्षों में इसके करीब 60000 करोड रु. तक पहुंचने की संभावना है। 352 अरब रुपए से अधिक के कारोबार के साथ यह क्षेत्र देश में 30 लाख से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध करवा रहा है। रोजगार की इस क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। कुक्कुटपालन को लेकर हलधर टाइम्स की डॉ. हानुप्रसाद भादू से हुई वार्ता के मुख्यांश...
देश में कुक्कुट विकास की स्थिति क्या है?
देश में मुर्गीपालन 8 से 10 प्रतिशत वार्षिक औसत विकास दर के साथ बढ़ रहा है। इससे यह कृषि क्षेत्र का अहम अंग बन चुका है। इसी का परिणाम है कि भारत विश्व में तीसरा सबसे बड़ा अण्ड़ा उत्पादक देश बन चुका है। वहीं, चिक न उत्पादन में 5 वां बड़ा देश है। अण्डा उत्पादन में बढ़ोत्तरी के बाद भी मांग और आपूर्ति में अंतर है। क्योंकि, लोगों की फूड हेबिट में तेजी से बदलाव आ रहा है। ऐसे में कहा जा सकता है कि देश में कुक्कुट विकास में असीम संभावनाएं छिपी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आजीविका के लिए बैक यार्ड पोल्ट्री फार्म और जापानी बटेर पालन को सरकार बढ़ावा दे रही है। मुर्गीपालक को पशुपालन विभाग अनुदान दे रहा है।
मुर्गियों का आहार प्रबंधन कैसे किया जाए ?
मुर्गी पालन में सबसे ज्यादा खर्च उनके दाने पर होता है। चूजों के लिए बाजार में फिनिशर और स्टार्टर राशन मिलता है। दाने में प्रोटीन और इसकी गुणवत्ता का ध्यान रखा जाए। चूजों को मक्का, सूरजमुखी, तिल, मूंगफली, जौ और गेहूं भी दे सकते है। मुर्गियों को चारा गीला करके देना चाहिए। मुर्गीयाँ गीला दाना अधिक खाती हैं। ध्यान रखें कि गीला दाना शाम तक खत्म हो जाए नहीं तो उससे बदबू पैदा हो जाती है। ऐसे दाने को सुबह किसी भी सूनत में नहीं देना चाहिए।

मुर्गीपालन को कैसे फायदेमंद बनाया जाए ?
मुर्गीपालन के लिए नस्ल चुनाव के साथ दूसरी बुनियादी बातों पर ध्यान देना आवश्यक है। जैसे मुर्गी फार्म के निकट बाजार और मुर्गी उत्पाद की मांग प्रमुख है। मुर्गी फार्म मांस और अंडे की खपत वाले स्थान पर ज्यादा उपयुक्त रहता है। क्योंकि, मुर्गीपालक को बाजार तलाशने की आवश्यकता नहीं रहती है। मुर्गीशाला ऊंचाई पर और शुष्क जगह पर बनानी चाहिए। मुर्गीशाला में आवागमन की सुविधा का ध्यान रखा जाए। तापमान लगभग 27 डिग्री सेंटीग्रेड के आसपास ठीक रहता है। दो पोल्ट्री फार्म के मध्य दूरी रखी जाए। फार्म की लंबाई पूरब से पश्चिम की ओर होना चाहिए। मध्य में उंचाई 12 फीट और साइड 8 फीट उंची होनी चाहिए। चौड़ाई 25 फीट और शेड का अंतर कम से कम बीस फीट होना चाहिए। मुर्गियों के शेड और बर्तनों की साफ सफाई हमेशा करते रहें। एक शेड में केवल एक ही ब्रीड के चूजे रखने चाहिए।