सर्दी का कहर: पशु और मुर्गियों की सुरक्षा कैसे करें

नई दिल्ली 07-Jan-2026 01:11 PM

सर्दी का कहर: पशु और मुर्गियों की सुरक्षा कैसे करें

(सभी तस्वीरें- हलधर)

सर्दियों में पशुओं को ठंड से बचाना अत्यावश्यक है। यदि पशु को ठंडी हवा, धुंध, कोहरा से बचाने का समुचित प्रबंध ना हो तो पशु बीमार पड़ जाते हैं। जिससे उनके उत्पादन में तो गिरावट आती ही है। साथ ही, पशु न्यूमोनिया जैसे रोगों के कारण मृत्यु को भी प्राप्त कर सकते हैं। सर्दियों में पशुओं के रहन-सहन और आहार का समुचित प्रबंध करना अत्यंत आवश्यक है। यदि पशुओं के रहन-सहन और आहार का उचित प्रबंध इस प्रतिकूल मौसम में नहीं किया जाए तो पशु के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन क्षमता पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। सामान्य रूप से गाय और भैंस के शरीर का तापमान 101.5 से 102 डिग्री फारेनहाइट के बीच रहता है। जबकि , सर्दियों में पशु आवास के भीतर का तापमान कभी-कभी शून्य डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है। ऐसी ठंड से पशु को बचाने के लिए पशु को हमेशा पशु आवास में ही बांधकर खिलाना एवं उसका दूध निकालना चाहिए।

इन बातों का रखें ध्यान

  • पशुशालाके दरवाजे खिड़कियां और दूसरे खुले स्थान पर रात के समय बोरी तिरपाल और टाट को टांगना चाहिए। जिससे पशुओं को सीधी ठंडी हवा से बचाया जा सके। यदि शीत लहर हो तो पशुओं को अलाव जलाकर भी सर्दी के प्रकोप से बचाया जा सकता है।
  • रातके समय पर पशुशाला के फ र्श पर पराली अथवा भूसा को बिछाएं। जिससे फर्श से सीधी ठंड पशुओं को न लगे।
  • पशुशालाका फ र्श ढलान युक्त होना चाहिए। जिससे पशुओं का मूत्र बहकर बाहर निकल जाए। ताकि बिछावन सूखा बना रहे।
  • पशुओंको दिन के समय धूप में छोड़ें। इससे पशुशाला का फ र्श अथवा जमीन सूख जाएगी। पशु को गर्माहट भी मिलेगी।
  • पशुको ताजा व स्वच्छ पानी ही पिलाएं जो अधिक ठंडा ना हो।
  • नवजातबच्चों और बीमार पशुओं को रात के समय किसी बोरी या तिरपाल से ढक दें। सुबह धूप निकलने पर हटा दें।
  • पशुओंको हरे चारे विशेषकर बरसीम अथवा रिजका के साथ तूड़ी अथवा भूसा मिलाकर खिलाएं। इससे पशु स्वस्थ और निरोग बना रहेगा और दूध का उत्पादन भी कम नहीं होगा। क्योंकि, केवल हरा चारा खिलाने से अफारा और अपच होने का भय बना रहता है। शीत ऋ तु में पशुओं को राशन में बाजरा कम मात्रा में खिलाना चाहिए । क्योंकि, सर्दी की ऋ तु में बाजरे का पाचन कम होता है। इसलिए बाजरा किसी भी संतुलित आहार में 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। रात के समय में पशुओं को सूखा चारा आहार के रूप में उपलब्ध कराए। सर्दी के मौसम में दुधारू पशुओं को बिनोला अधिक मात्रा में खिलाना चाहिए। जिससे दूध के अंदर वसा की मात्रा बढ़ सके। पशुओं के रहने के स्थान पर सेंधा नमक का ढेला रखना चाहिए। ताकि, पशु आवश्यकता के अनुसार उसे चाटता रहे|

प्राथमिक उपचार

  • अलावजलाकर उसके शरीर को गर्मी प्रदान करें अथवा गर्म तेल से मालिश करें।
  • पशुकी नाक में अजवाइन का धुआं करने से सांस लेने में आसानी होती है।
  • पशुको अपच अथवा आफरा होने पर 50 ग्राम तारपीन का तेल 5 से 10 ग्राम हींग को आधा लीटर सरसों के तेल अथवा अलसी के तेल में मिलाकर पिलाएं।

उपचार: पशु को सर्दी अथवा निमोनिया अथवा दस्त होने पर तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सक से उसका उपचार कराएं।

उचित आहार व्यवस्था:

सर्दी के मौसम में सभी पशुपालक अपने पशुओं को संतुलित आहार दें। जिसमें ऊर्जा प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा खनिज तत्व और विटामिन आदि पोषक तत्व समुचित मात्रा में मौजूद हो। इस मौसम में गर्म तासीर के खाद्य पदार्थ जैसे गुड़ तेल अजवाइन और सोंठ को, पशु आहार में शामिल करना लाभदायक होता है। 

स्वास्थ्य सुरक्षा:

सर्दी के मौसम में पशुओं में दुग्ध ज्वर, गलाघोटू, खुरपका मुंहपका, पीपीआर, आंत्र विषाक्तता आदि बीमारियों से पशुओं को बचाने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष टीकाकरण अभियानों के अंतर्गत समय-समय पर रोग निरोधक टीके लगवाएं और  बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। किसी अच्छे पशु चिकित्सक द्वारा इलाज कराएं। पशुओं को आंतरिक परजीवीयों से बचाने के लिए समय-समय पर पशु चिकित्सक की सलाह पर  कृमि नाशक औषधि देनी चाहिए। ब्राह्य परजीवीओं जैसे मच्छर, मक्खी, जुएं आदि की रोकथाम के लिए पशुशाला की सफाई के साथ-साथ पशु चिकित्सक के परामर्श पर एंटीसेप्टिक एंटीमाइक्रोबियल दवाइयों का छिड़काव करें।


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