श्वेत क्रांति 2.0 से बदलेगी डेयरी व्यवस्था, बढ़ेगी पशुपालकों की आय

नई दिल्ली 31-Dec-2025 02:53 PM

श्वेत क्रांति 2.0 से बदलेगी डेयरी व्यवस्था, बढ़ेगी पशुपालकों की आय

(सभी तस्वीरें- हलधर)

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सबसे अधिक रोजगार, पोषण और आय का आधार देने में डेयरी व्यवसाय का प्रमुख स्थान रहा है। पहली श्वेत क्रांति ने देश को दुग्ध उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर ही नहीं। बल्कि, विश्व में अग्रणी बनाया। किंतु , के साथ यह भी स्पष्ट हो गया कि केवल दूध की मात्रा बढ़ाना अब पर्याप्त नहीं है। आज देश का डेयरी क्षेत्र कई जटिल चुनौतियों से जूझ रहा है, पशुओं की घटती प्रजनन क्षमता, पहले बछड़े देने के समय अधिक आयु, कम गर्भधारण दर, बढ़ती लागत और असंगठित बाजार का दबदबा। इन समस्याओं ने पशुपालकों की आय को सीमित कर दिया है। ऐसे में श्वेत क्रांति 2.0 केवल एक नई योजना नहीं, बल्कि डेयरी क्षेत्र की सोच और दिशा बदलने का प्रयास है। श्वेत क्रांति 2.0 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उत्पादन को लक्ष्य नहीं, बल्कि परिणाम मानती है। अब फोकस पशु की पूरी उत्पादक यात्रा पर है उसके जन्म से लेकर उच्च दुग्ध उत्पादन तक। इसके केंद्र में पशु प्रजनन क्षमता का अनुकूलन, पहले बछड़े देने के समय वाली आयु में कमी, और बेहतर कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं के माध्यम से गर्भधारण दर में सुधार जैसे विषय हैं। उन्नत तकनीकों जैसे भ्रूण प्रत्यारोपण के माध्यम से श्रेष्ठ नस्लों को बढ़ावा देने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि श्वेत क्रांति 2.0 केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर नहीं रहना चाहती। बल्कि, विज्ञान और प्रबंधन को एक साथ जोड़कर आगे बढऩा चाहती है। भारत में श्वेत क्रांति लाने के लिए अब केवल दूध की मात्रा नहीं, बल्कि उत्पादकता, प्रजनन दक्षता, गुणवत्ता और किसान की आय को केंद्र में रखा जा रहा है।

प्रजनन सुधार: असली नींव

भारत में डेयरी पशुओं की सबसे बड़ी समस्या कम गर्भधारण दर और पहला बछड़ा देर से आना है। जब तक पहले बछड़े के जन्म के समय मादा पशु उम्र उम्र कम करने पर काम नहीं किया जाएगा, तब तक पशुपालक को समय पर आर्थिक लाभ नहीं मिल सकता। श्वेत क्रांति में बेहतर कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं और गर्भधारण दर बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ताकि, कम प्रयास में अधिक सफल गर्भधारण हो सके। इसके साथ ही पशु प्रजनन क्षमता अनुकूलन के अंतर्गत पोषण, हार्मोनल बैलेंस, हीट डिटेक्शन और समयबद्ध गर्भाधान को एक पैकेज के रूप में लिया जाना चाहिए। उन्नत नस्ल सुधार के लिए ईटीटी और आईवीएफ जैसी तकनीकें अपनाकर श्रेष्ठ जीन वाले पशुओं की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है।

गाँव से बदलाव की शुरुआत

डेयरी क्षेत्र में स्थायी बदलाव सहकारी व्यवस्था के बिना संभव नहीं है। इसी समझ के साथ श्वेत क्रांति 2.0 में दुग्ध सहकारी समितियों के विस्तार और सुदृढ़ीकरण को प्राथमिकता दी गई है। ग्राम पंचायत स्तर पर नई डेयरी सहकारी समितियों का गठन किया जा रहा है। ताकि, पशुपालकों को दूध बेचने, भुगतान पाने और सेवाएँ प्राप्त करने के लिए दूर न जाना पड़े। दुग्ध समितियों का डिजिटलीकरण इस बदलाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। डिजिटल रिकॉर्ड, पारदर्शी भुगतान प्रणाली और समयबद्ध लेन-देन से सहकारी ढाँचे में विश्वास बढ़ा है और बिचौलियों की भूमिका स्वत: कमजोर हुई है।

आधारभूत संरचना का विस्तार

पशुपालकों के लिए पूंजी की उपलब्धता हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। इसे दूर करने के लिए पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से बिना गारंटी ऋण की सुविधा दी जा रही है। दूध संग्रह केंद्रों, माइक्रो-एटीएम और ग्रामीण दुग्ध अवसंरचना के विस्तार से पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएँ मिल रही हैं, जिससे उनकी निर्भरता साहूकारों और निजी एजेंटों पर कम हो रही है।

मूल्य संवर्धन और संगठित विपणन 

श्वेत क्रांति 2.0 का उद्देश्य केवल दूध बेचने तक सीमित नहीं है। असंगठित क्षेत्र के वर्चस्व को कम कर संगठित खरीद व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। पनीर, दही, घी और अन्य दुग्ध उत्पादों में मूल्य संवर्धन से किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है। साथ ही निर्यात की संभावनाओं को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की ओर भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं, जहाँ अधिक लाभ की संभावना है।

निगरानी, समन्वय और जवाबदेही

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और नाबार्ड के सहयोग से राज्य पशुपालन विभाग योजनाओं की निरंतर निगरानी कर रहे हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि श्वेत क्रांति 2.0 केवल घोषणा तक सीमित न रहे, बल्कि ज़मीनी स्तर पर वास्तविक परिवर्तन ला सके। श्वेत क्रांति 2.0 भारत के डेयरी क्षेत्र के लिए एक नई दृष्टि प्रस्तुत करती है। यह पहल पशुपालकों की आय, महिलाओं की भूमिका और आधुनिक तकनीक—तीनों को एक साथ जोड़ती है। यदि इसे निरंतरता, पारदर्शिता और ज़मीनी प्रतिबद्धता के साथ लागू किया गया, तो यह केवल डेयरी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण भारत के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध हो सकती है।

 डॉ योगेश आर्य, पशुचिकित्सा विशेषज्ञ, नीमकाथाना


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