पशुपालन विभाग की समीक्षा बैठक, शासन सचिव ने दिए निर्देश
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। पशुपालन, गोपालन और मत्स्य विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा की अध्यक्षता में पशुपालन विभाग की समीक्षा बैठक शासन सचिवालय में आयोजित हुई। बैठक में पशुपालन विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और विभाग के सुदृढ़ीकरण सहित अन्य विषयों की प्रगति की समीक्षा की गई। शासन सचिव शर्मा ने बैठक में कहा कि मुख्यमंत्री मोबाइल वेटरनरी यूनिट के प्रभावी और सुचारू संचालन के प्रति बहुत गंभीर हैं। मोबाइल वेटरनरी यूनिट का गुणवत्तापूर्ण उपयोग हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समस्त मोबाइल वेटरनरी यूनिट के बेस लोकेशन का निर्धारण किया जाए। डॉ. शर्मा ने कहा कि कार्य समय पर यूनिट्स नजदीकी पशु चिकित्सालय में उपलब्ध रहें। उन्होंने मोबाइल वेटरनरी यूनिट के जीपीएस डेटा का नियमित रूप से गहन विश्लेषण करते हुए सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर स्थिर रहने वाले वाहनों का अधिकतम सदुपयोग हो सके।
पशुपालकों से फीडबैक प्राप्त कर कमियों में हो सुधार
पशुपालन शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने बैठक में मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स में नियोजित स्टाफ की नियमित उपस्थिति और औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कॉल सेंटर के माध्यम से मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स की सेवाएं लेने वाले पशुपालकों से फीडबैक प्राप्त कर कमियों में सुधार किया जाए तभी इस सेवा को और बेहतर बनाया जा सकता है। डॉ. शर्मा ने राज्य सरकार की बजट घोषणा के अंतर्गत 12 लाख सेक्स सॉर्टेड सीमन के उपयोग से कृत्रिम गर्भाधान की समीक्षा करते हुए कहा कि इस तकनीक का उद्देश्य मादा गौवंश पैदा होने की संभावना को बढ़ाकर पशुपालकों की आय में वृद्धि करना है। उन्होंने प्रगति की जिलेवार समीक्षा करते हुए कुछ जिलों की अत्यंत धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की और योजना के प्रभावी पर्यवेक्षण पर बल दिया, जिससे सेक्स सॉटेड सीमन का शत प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित हो।
डॉ. समित शर्मा ने कार्य में गति लाने के लिए संस्थावार और तकनीकी कार्मिकवार लक्ष्य निर्धारित कर नियमित समीक्षा करने पर जोर देते हुए कमजोर प्रगति वाली संस्थाओं और कार्मिकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश प्रदान किए। उन्होंने योजना के अधिक से अधिक प्रचार प्रसार पर भी जोर दिया और दैनिक प्रगति अनिवार्य रूप से पशुधन एप पर दर्ज करने के निर्देश दिए। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूल न की जाए और प्राइवेट सीमन पर पूर्ण पाबंदी लगाई जाए अन्यथा अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
दवा के लिए कोई पैसे ले तो कठोर कार्रवाई की जाए
पशुपालन शासन सचिव ने रोग प्रतिरोधक टीकाकरण की स्थिति पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे निर्धारित अवधि में पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि सख्ती और समन्वय के बीच अच्छा तालमेल बिठाते हुए हमें 31 मार्च तक 21 लाख पशुओं के बीमा का लक्ष्य पूरा करना है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकार की ओर से पशुओं के उपचार के लिए निःशुल्क दवा दी जाती है। यदि इस दवा के लिए कोई पैसे लेता है तो तत्काल कठोर कार्रवाई हो। शासन सचिव ने ऑनलाइन मासिक प्रगति, मुख्य संकेतक बिंदुओं के आधार पर जिलों की प्रगति तथा टीकाकरण के क्षेत्र में विभाग की प्रगति पर अधिकारियों को बधाई दी।
डॉ. शर्मा ने भारत पशुधन एप पर पशु एवं पशुपालक के डेटा डिजिटलाइजेशन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आगामी समय में केन्द्र सरकार से मिलने वाले बजट के लिए यह भी एक आधार होगा। पशुपालन शासन सचिव ने योजनाओं की लक्ष्य आधारित मॉनिटरिंग और प्रभावी क्रियान्वयन, विभाग का डिजिटलीकरण और कार्मिकों के सतत् प्रशिक्षण पर भी बल दिया। शासन सचिव ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पशु चिकित्सकों से व्यक्तिगत रूप से बात की और उनकी सराहना करते हुए अन्य चिकित्सकों को उनसे प्रेरणा लेने की सलाह दी।
बैठक में ये अधिकारी भी रहे शामिल
पशुपालन विभाग की समीक्षा बैठक में संयुक्त शासन सचिव दिनेश कुमार जांगिड, पशुपालन निदेशक व आरएलडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुरेश मीना, पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. प्रवीण सेन, डॉ. विकास शर्मा, डॉ. ओमप्रकाश बुनकर, डॉ. हेमंत पंत सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं, संभागों से अतिरिक्त निदेशक, जिलों से संयुक्त निदेशक सहित अन्य पशु चिकित्साधिकारी बैठक में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।