नर बछड़ों की समस्या क्यों नहीं सुलझी? सरकारी योजना की सच्चाई

नई दिल्ली 06-Jan-2026 12:06 PM

नर बछड़ों की समस्या क्यों नहीं सुलझी? सरकारी योजना की सच्चाई

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। सेक्स सॉर्टेड सीमन तकनीक के माध्यम से मादा पशुओं का अनुपात बढ़ेगा, जिससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी और डेयरी किसानों की आय में सुधार होगा। लेकिन, प्रशासनिक स्तर के इन दांवो की हकीकत कुछ ओर है। गौतरलतब है कि चालू वित्तीय वर्ष के लिए सरकार ने 12 लाख डोज वितरण का लक्ष्य तय किया था। लेकिन, अब तक जिलों में 2 लाख डोज का ही वितरण हो पाया है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि सेक्स सार्टेड सीमन की शेष डोज कैसे प्राप्त होगी और नर बछड़ो की समस्या कैसे दूर होगी। क्योंकि, योजना की प्रगति विभाग के ही शासन सचिव डॉ. समित शर्मा की आंखो में खटक रही है। योजना की धीमी प्रगति पर वो समीक्षा बैठक के दौरान नाराजगी भी जता चुके है। गौरतलब है कि प्रदेश में लावारिस नर गोवंश की समस्या लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। सडक़ों, खेतों और सार्वजनिक स्थलों पर घूमते लावारिस व बेसहारा नर गोवंश दुर्घटनाओं और फसलों के नुकसान का कारण बनते हैं। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने सेक्स सोर्टेड़ सीमन योजना शुरू की है। लेकिन, योजना की धीमी प्रगति सरकार की मंशा पर पानी फेरती नजर आ रही है।

क्या है योजना

सेक्स सॉर्टेड सीमन लिंग-आधारित वीर्य एक उन्नत तकनीकी डोज का वितरण किया जा रहा है। यह उन्नत तकनीक कृत्रिम गर्भाधान में उपयोग होती है, जिससे 90 प्रतिशत मादा बछिया पैदा होती है। इससे न केवल नर बछड़ों की संख्या में कमी आएगी, बल्कि दुग्ध उत्पादन में भी बढ़ोतरी संभव है।

अकुशल एआई कार्मिक

पशुपालकों का कहना है कि यह योजना डेयरी उद्योग के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है, बशर्ते प्रजनन नीति-2014-15 की पालना तय हो। पशुपालन विभाग ने जिस उद्देश्य से प्रजनन नीति को लागू किया, धरातल पर अकुशल कृत्रिम गर्भाधन कर्ता उसकी बैंड बजा रहे हैं। इसलिए कृत्रिम गर्भाधान करने वाले निजी लोगों पर विभाग का नियंत्रण और मॉनिटरिंग होनी चाहिए। अन्यथा गोवंश की नस्ल बिगड़ जाएगी। साथ ही गायों में प्रजनन संबंधी बीमारियां भी हो जाएगी। गौरतलब है कि प्रदेश में कई छोलाछाप एआई का कार्य कर रहे है।  जिनके पास सीमन कहां से आ रहा है, इसका न तो सरकार या विभाग के पास कोई रिकार्ड है और न ही कोई मानिटरिंग, ऐसे में वो मनमर्जी से कृत्रिम गर्भाधान कर रहे हैं।

पशुपालकों को मिलेगी निजात

पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सेक्स सॉर्टेड सीमन एक अत्याधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी है, जिसमें नर और मादा गुणसूत्रों को अलग किया जाता है। इसके बाद केवल मादा गुणसूत्र युक्त सीमन का उपयोग कृत्रिम गर्भाधान के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया से लगभग 90 प्रतिशत तक मादा बछिया के जन्म की संभावना रहती है। इससे किसानों को अनचाहे नर बछड़ों के पालन-पोषण की समस्या से निजात मिलेगी।

बस्सी में यूनिट स्थाना की तैयारी

सरकार ने इस योजना को और प्रभावी बनाने के लिए जयपुर जिले के बस्सी में सेक्स सॉर्टेड सीमन की यूनिट स्थापित करने के लिए बजट स्वीकृत किया है। इस यूनिट के शुरू होने से प्रदेश को बाहर से सीमन मंगाने पर निर्भरता कम होगी और लागत में भी कमी आएगी। साथ ही समय पर पर्याप्त मात्रा में सीमन उपलब्ध हो सकेगा, जिससे कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम को मजबूती मिलेगी।