बोर्ड परीक्षा से पहले बड़ा फैसला: 2026 में पशु कल्याण अनिवार्य
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को एक नई जिम्मेदारी सौंप दी है। अब शिक्षक स्कूलों में बच्चों को गणित-विज्ञान पढ़ाने के साथ-साथ पशुपालन और पशु कल्याण के गुर भी सिखाएंगे। निदेशालय ने आदेश जारी कर 13 फरवरी तक पूरे राज्य में पशुपालन और पशु कल्याण जागरुकता माह मनाने के निर्देश दिए हैं। एक ओर जहां बोर्ड परीक्षाएं और वार्षिक परीक्षाएं नजदीक हैं, वहीं शिक्षकों के सामने अब इस जागरुकता अभियान को सफल बनाने की चुनौती है।
क्या-क्या करना होगा स्कूलों को
विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार स्कूलों में कई गतिविधियां होंगी। इनमें पशु कल्याण पर आधारित निबंध, वाद-विवाद और नाटक मंचन। विद्यार्थियों और पशुपालन विशेषज्ञों की इंटरैक्टिव क्लासरूम विजिट करना। बच्चों को आधुनिक खेती और पशुओं की देखभाल की जानकारी देना। चरवाहों और दूरदराज के गांवों में जाकर पशुधन के प्रति जागरुकता फैलाना।
पढ़ाई प्रभावित होने का डर
शिक्षकों का कहना है कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला है, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन इसके लिए स्कूल के समय और शिक्षकों का उपयोग करना छात्रों की पढ़ाई को प्रभावित कर सकता है