मौसम चक्र की मार से बदला रहा खेती का पैटर्न, खरीफ उत्पादन में भारी गिरावट

नई दिल्ली 09-Mar-2026 04:22 PM

मौसम चक्र की मार से बदला रहा खेती का पैटर्न, खरीफ उत्पादन में भारी गिरावट

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। प्रदेश की कृषि भी मौसमी चक्र का शिकार होने लगी है। मौसम चक्र में आ रहे बदलाव का सीधा प्रभाव खाद्यान्न उत्पादन पर नजर आने लगा है। उदाहरण के तौर पर फरवरी माह के दौरान तापमान में बढौत्तरी को लिया जा सकता है। गौरतलब है कि वर्ष 2025-26 में खरीफ खद्यान्न और रबी फसलों की पैदावार में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। सरकार के आंकडों पर नजर डाले तो खरीफ खाद्यान्न फसलो के उत्पादन में 21.61 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं, रबी उत्पादन में भी 0.49 फीसदी कम रहा है। 

कृषि विशेषज्ञो का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की मार का सीधा असर फसलों की पैदावार पर पड़ रहा है।  फूल आने और दाना बनने के समय तेज गर्मी से अनाज, सब्जी और फल वाली फसलें कमजोर हो रही हैं। वहीं, बेमौसम बारिश से कहीं बुवाई में देरी तो कहीं तैयार फ सल खराब हो रही है। कटाई के वक्त ज्यादा बारिश होने से किसानों को कटाई के बाद भी भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसके अलावा कीटों और बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। बढ़ते तापमान और आद्र्रता में उतार-चढ़ाव कीटों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं। इस स्थिति के कारण किसानों को फ सल सुरक्षा रणनीतियों में बीच मौसम में ही बदलाव करना पड़ता है। गौरतलब है कि राज्य में वर्ष 2025-26 के दौरान कुल खाद्यान्न का उत्पादन 283.94 लाख एमटी रहने की संभावना है। जो वर्ष 2024-25 की तुलना में 8.24 फीसदी कम है। 

खेती के पैटर्न में तेजी से बदलाव

जो कुछ हो रहा है, वह सिर्फ  एक साल की परेशानी नहीं है। बल्कि, खेती में बड़ा बदलाव है। मौसम के बार-बार बदलने से किसान अब बुवाई और कटाई का समय भी बदलने लगे हैं। जिन इलाकों में पहले कुछ खास फ सलें उगाई जाती थी, अब वहां यह सोचा जा रहा है कि आगे भी वे फ सलें ठीक रहेंगी अथवा नहीं।  हालात ऐसे हैं कि किसानों को अब ज्यादा सोच-समझकर फैसले लेने पड़ रहे हैं।  इसलिए मोबाइल ऐप, डिजिटल सलाह और सीधे विशेषज्ञों से मिलने वाली सलाह पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है। 

एक नजर खाद्यान्न उत्पादन

वर्ष 2025-26 खरीफ में खाद्यान्न उत्पादन 89.55 लाख एमटी होने का अनुमान है। जबकि, पिछले साल 114.24 लाख एमटी का उत्पादन मिला। इस तरह 21.61 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं, रबी खाद्यान्न भी 0.49 कम रहने की संभावना है। रबी खाद्यान्न का उत्पादन 194.43 लाख एमटी के करीब रहेगा। जबकि, वर्ष 2024-25 के दौरान 195.38 लाख एमटी उत्पादन मिला था। 

फसल वार घटत बढ़त

खरीफ अनाज फसल(वर्ष 2025-26) का उतपादन 69.03 रहा। जबकि, पिछले वर्ष 94.19 रहा। इस तहर 26.71 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं, रबी में अनाज का उत्पादन 167.82 लाख एमटी रहने की संभावना है। जो वर्ष 2024-25 के 173.63 लाख एमटी की तुलना में 3.35 प्रतिशत कम है। 

रबी-खरीफ दलहन-तिलहन

वर्ष 202-26 के दौरान खरीफ दलहन का उत्पादन 20.52 फीसदी रहा। जो पिछले साल से 2.34 फीसदी अधिक है। वहीं, रबी दलहन में भी 22.34 फीसदी की वृद्धि वर्ष 2024-25 के मुकाबले दर्ज हुई है। वर्ष 2025-26 के दौरान रबी दलहनी फसलों का उत्पादन 26.61 लाख एमटी रहा है। नजर डाले खरीफ तिलहन पर तो वर्ष 2024-25 की तुलना में 7.18 फीसदी की बढौत्तरी हुई है। वर्ष 2025-26 के दौरान खरीफ तिलहन का उत्पादन 100.46 लाख एमटी रहा। वहीं, रबी में 59.23 लाख एमटी रहने का अनुमान है। जो वर्ष 2024-25 से 6.72 फीसदी अधिक है।