खेत में थ्रेसर चलाते समय न करें ये गलतियां, जानिए जरूरी सावधानियां
(सभी तस्वीरें- हलधर)खरीफ फसल की कटाई-मड़ाई का कार्य प्रदेश में शुरू हो चुका है। खरीफ की नई फसल बाजार में भी पहुंचने लगी है। लेकिन, इन कृषि कार्यों के दौरान थोड़ी सावधानी बरतना जरूरी है। क्योंकि, अधिकांश दुर्घटना जैसे खलिहान में आग लगना, पावर थ्रेशर पर कार्य करने अथवा बिना मौसम वर्षा होने की वजह से होती है। दुर्घटना में प्रतिवर्ष कितने ही श्रमिक और मजदूर विकलांग बन जाते हैं। जिसके लिए प्रमुख रूप से चार कारण जिम्मेदार हैं-
मानवीय कारक
एक अनुमान के अनुसार 2500 व्यक्ति प्रतिवर्ष पावर थ्रेशर पर कार्य करते समय दुर्घटना के शिकार होते हैं। इसमें से आधी दुर्घटनाएं कार्य करने वाले अप्रशिक्षित मजदूर के कारण होती है, जो कि ढीले-ढाले कपड़े पहनकर कार्य करते हैं। महिला और बच्चों का मशीन पर कार्य भी दुर्घटना को बढ़ावा देता है। इस प्रकार की दुर्घटनाओं से बचाव हेतु निम्न सावधानी रखनी आवश्यक है-
पावर थ्रेशर पर प्रशिक्षित मजदूर से ही कार्य करवाना चाहिए।
किसी भी प्रकार का नशा नहीं करें।
शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति को इस कार्य से दूर रखें।
ढीले-ढाले कपड़े नहीं पहनें।
थ्रेशर के पतनाले से फसल को अंदर डालें। जहां तक पतनाला खुला हो, हाथ वहीं तक रखें।
फसल थोड़ी मात्रा में मशीन के अंदर डालें। इससे मजदूर को अधिक ताकत का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता है और हाथ कटने की संभावना कम रहती है।
मशीन पर आठ घंटे से अधिक कार्य नहीं करें। समय-समय पर विश्राम भी करें, ताकि कार्य के दौरान सक्रियता बनी रहे।
खलिहान में प्राथमिक उपचार बॉक्स रखना चाहिए, ताकि दुर्घटना होने पर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की प्राथमिक चिकित्सा की जा सके।
फसल संबंधी कारक
बौनी फसल और डंठल पतनाले में नहीं डालें। इससे हाथ कटने की संभावना रहती है।
गीली और कच्ची फसल काटने के बाद अच्छी तरह सुखाकर ही थ्रेशर में डालें। अन्यथा गीली फसल शाफ्ट में लिपट जाती है और रगड़ से मशीन में आग लग सकती है।
पर्यावरणीय कारक
फसल काटने के बाद खलिहान में मड़ाई करने से होने वाली दुर्घटनाओं में पर्यावरण भी अहम भूमिका निभाता है इसलिए निम्न उपाय दुर्घटना से बचाव हेतु आवश्यक रूप से अपनाने चाहिए।
खलिहान, बिजली की लाइनों के नीचे, सड़क, रेलवे लाइन, ईंट भट्टे के पास और निचले स्थानों पर नहीं होने चाहिए। अन्यथा इनके कारण आग लगने की संभावना अधिक रहती है। निचले स्थानों पर पानी भरने से फसल को हानि हो सकती है।
रात्रि में थ्रेशर चलाते समय प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
तेज हवा और धूप में मशीन नहीं चलाये।
हवा और मशीन की दिशा का ध्यान रखें, ताकि भूसा ऊपर तक उड़कर नहीं आए।
खलिहान के पास छाया और पानी की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।