मक्का चावल-गेहूँ के बाद विश्व की प्रमुख खाद्यान्न फसलों में एक है। इसको पहले विशेष रूप से गरीब लोगों का मुख्य भोजन माना जाता था। यह औद्योगिक फसल होने के साथ-साथ कुक्कुट आहार, पशु आहार, स्टार्च, आदि के रूप में उपयोग में आती है। मक्का के विभिन्न उत्पाद पौष्टिक आहार, तेल, साबुन आदि के रूप में किया जाता है। मक्का के अच्छे उत्पादन के लिए उन्नत तरीकों से खेती करनी चाहिए। इसकी फसल पर कई प्रकार के कीट और रोग का प्रकोप होता है। इनसे बचाव के लिए समय रहते इनकी पहचान कर उचित उपाय करने चाहिए। जिससे फसलोत्पादन में होने वाले नुकसान से बचा जा सके।
कीट नियंत्रण
तनाछेदक
- कीट द्वारा प्रभावित पौधों को निकालकर नष्ट कर दें। 8-10 ट्राइकोकार्ड प्रति हैक्टेयर खेत में लगावें। क्लोरोपाईरीफॉस 20 ई.सी. अथवा क्यूनालफॉस 25 ई.सी. 1.50 मिली प्रतिलीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें।
दीमक
- खड़ी फसल में दीमक का प्रकोप होने पर सिंचाई के साथ क्लोरोपाईरीफॉस 2.5 लीटर प्रति हैक्टेयर की दर से जमीन में देवें।
पत्ती लपेट
- ट्राईकोग्रामा परजीवी 50000 प्रति हैक्टेयर की दर से अंकुरण के आठ दिन बाद 5 से 6 दिन के अन्तराल पर 4 से 5 बार फसल पर छोड़ने चाहिए। क्लोरोपाईरीफॉस 20 ई.सी. अथवा क्यूनालफॉस 25 ई.सी. 1.50 मिली प्रतिलीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करना चाहिए।
मक्का का छाले वाला भृंग
- उर्वरकों का संतुलित मात्रा में उपयोग करें। डाइमेथोएट 2 मिली या इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मिली प्रतिलीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें।
सैनिक सूण्डी
- क्यूनालफॉस 25 ईसी 1.5 मिली अथवा इंडोक्साकार्ब 0.3 मिली प्रतिलीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
कटुआ कीट
- क्यूनालफॉस 25 ईसी. अथवा क्लोरोपाईरीफॉस 20 ईसी. 2 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छोटे पौधों को नहलावें।
रोमिल सूण्डी, टिड्डा
- नियंत्रण के लिए मेलाथियान 5 प्रतिशत पाउडर 10-15 किलोग्राम अथवा क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत पाउडर 15-16 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से फसल पर भूरकाव करें।
रोग नियंत्रण
तुलासित
- फसल में जैसे ही रोग दिखाई दें 2.5 ग्राम मैन्कोजेब प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़कें। आवश्यकतानुसार रिडोमिल 25 डब्लू पी का 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें। 10-12 दिन बाद छिड़काव पुनः दोहरावें।
तना सड़न
- 500 ग्राम कॉपर आक्सीक्लोराइड अथवा 60 ग्राम एग्रीमायसीन प्रति हैक्टेयर की दर से पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। अथवा स्ट्रेप्टोसाइकिलिन 200 पीपीएम का घोल बनाकर छिड़काव करें।
बैंडेड लीफ, शीथ ब्लाइट
- रोकथाम के लिए मित्र जीवाणु स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस कल्चर 10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज में मिलाकर उपचारित करें।
टर्सीकम लीफब्लाइट
- मैन्कोजेब की 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर 8-10 दिन के अन्तराल पर फसल पर छिड़काव करें।
फ्यूजेरियम तना गलन
- बीजों को बुवाई से पूर्व कारबेन्डाजिम + थिराम (2:1) से बीजोपचार करना चाहिए। रोग प्रतिरोधी किस्में का उपयोग करना चाहिए।