धान की रोपाई से पहले अपनाएं यह आसान उपाय, कीटों से बचेगी फसल और बढ़ेगा उत्पादन
धान की रोपाई से पहले अपनाएं यह आसान उपाय, कीटों से बचेगी फसल और बढ़ेगा उत्पादन
(सभी तस्वीरें- हलधर)धान की नर्सरी के पौधे अधिक लंबे हो जाने पर रोपाई से पहले उनके ऊपरी हिस्से (लगभग 30%) को काट देना एक बेहद फायदेमंद तरीका माना जाता है। इससे पत्तियों पर मौजूद हानिकारक कीटों, जैसे तना छेदक और पत्ती मोड़क (सुंडी), का प्रकोप मुख्य खेत में पहुंचने से पहले ही रुक जाता है और पौधे भी अधिक मजबूत बनते हैं। यदि नर्सरी 25-30 दिन से अधिक की हो जाए और पौधे 1 से 1.5 फीट तक लंबे हो जाएं, तो कृषि विशेषज्ञ उन्हें ऊपर से काटने की सलाह देते हैं। इससे पत्तियों के ऊपरी हिस्से पर मौजूद कीट और उनके अंडे कटाई के साथ ही नष्ट हो जाते हैं, जिससे मुख्य फसल सुरक्षित रहती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, नर्सरी की कटाई के बाद पौधों में फुटाव (टिलरिंग) बेहतर होता है और वे रोपाई के दौरान होने वाले तनाव को भी आसानी से सहन कर लेते हैं। हालांकि, इस काम को करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना भी बेहद आवश्यक है। पौधों की कटाई हमेशा रोपाई से ठीक एक-दो दिन पहले या नर्सरी उखाड़ते समय करनी चाहिए। कटाई के लिए साफ और तेज औजार, जैसे हंसिया या दरांती, का उपयोग करें ताकि पौधे कुचले न जाएं। वहीं, नर्सरी उखाड़ने से एक दिन पहले खेत में पर्याप्त पानी भर देना चाहिए, ताकि पौधों की जड़ें सुरक्षित रहें और उन्हें नुकसान न पहुंचे।
नर्सरी से ही शुरू हो जाता है कीटों का हमला
कीटों की बात करें तो धान की फसल में तना छेदक (टॉप बोरर) और पत्ती मोड़क कीट का प्रकोप अक्सर नर्सरी से ही शुरू हो जाता है। यदि किसान समय रहते सावधानी बरतें, तो बिना महंगे कीटनाशकों के भी इस समस्या पर आसानी से काबू पाया जा सकता है।
नर्सरी से ही बचाव जरूरी
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जब धान की पौध नर्सरी से उखाड़कर रोपाई के लिए तैयार की जाती है, उसी समय कीटों के अंडे पौध के ऊपरी हिस्से में मौजूद होते हैं। ऐसे में किसानों को सलाह दी जाती है कि पौध की करीब एक इंच ऊपरी चोटी तोड़ दें और इस हिस्से को खेत में न फेंकें, बल्कि इसे पॉलीथीन में इकट्ठा कर किसी गड्ढे में दबा दें। इससे तना छेदक के अंडे पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं और आगे उनका फैलाव रुक जाता है।
सुबह और शाम में ज्यादा सक्रिय रहता है कीट
जानकार बताते हैं कि तना छेदक दिन के समय कम दिखाई देता है। इसे सुबह 5 से 6 बजे के बीच पौधों के ऊपर देखा जा सकता है, लेकिन दिन चढ़ने के बाद यह नजर नहीं आता। यह कीट मुख्य रूप से रात में सक्रिय रहता है। इसलिए इस कीट को नियंत्रित करने की कोशिश भी शाम के समय करना अधिक प्रभावी माना जाता है।
रोपाई के बाद अपनाएं यह देसी तरीका
जब धान की पौध करीब एक फीट ऊंची हो जाए, तब कीट नियंत्रण के लिए किसान एक बेहद सरल और सस्ता उपाय अपना सकते हैं। एक बांस का टुकड़ा लेकर उसमें रस्सी बांधें और उसे खेत में चारों ओर घुमाएं। इससे कीटों का प्रभाव कम होता है और पौधों की बढ़वार यानी टिलरिंग भी बेहतर होती है।
पत्ती मोड़क कीट से होता है भारी नुकसान
पत्ती मोड़क कीट पत्तियों को मोड़कर उनके भीतर छिप जाता है और अंदर से रस चूसता रहता है। ऐसे में ऊपर से दवा का छिड़काव करने पर भी उसका असर नहीं हो पाता। यही वजह है कि इस कीट को पहचानना और इसका सही समाधान निकालना किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
रस्सी और झाड़ू से मिलेगा आसान समाधान
पत्ती मोड़क कीट के नियंत्रण के लिए किसान एक बेहद आसान देसी उपाय अपना सकते हैं। करीब 10 मीटर लंबी रस्सी लेकर दो लोग उसे खेत में चारों ओर घुमाएं। यदि किसान अकेला हो, तो नारियल की झाड़ू को डंडे में बांधकर फसल के ऊपर फेर सकता है। इससे पत्तियों में छिपे कीट नीचे गिरकर पानी में चले जाते हैं और नष्ट हो जाते हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान की फसल को कीटों से बचाने के लिए शुरुआत से ही सतर्क रहना सबसे जरूरी है। समय पर पहचान, नर्सरी स्तर पर सावधानी और देसी उपाय अपनाकर किसान न केवल कीटनाशकों पर होने वाला खर्च कम कर सकते हैं, बल्कि फसल की सेहत सुधारकर उत्पादन और मुनाफा भी बढ़ा सकते हैं।