बूंद-बूंद सिंचाई कैसे बचाती है पानी? जानें खेती के बड़े फायदे 

नई दिल्ली 17-Sep-2026 01:00 PM

बूंद-बूंद सिंचाई कैसे बचाती है पानी? जानें खेती के बड़े फायदे 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

टपक या बूंद-बूंद सिंचाई एक ऐसी सिंचाई विधि है जिसमें पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में, कम अन्तराल पर, प्लास्टिक की नालियों द्वारा सीधा पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। परंपरागत सतही सिंचाई द्वारा जल का उचित उपयोग नहीं हो पाता। क्योंकि, अधिकतर पानी, जो पौधों को मिलना चाहिए, जमीन में रिसकर या वाष्पीकरण द्वारा व्यर्थ चला जाता है। अतः उपलब्ध जल का सही और पूर्ण उपयोग करने के लिए एक ऐसी सिंचाई पद्धति अनिवार्य है जिसके द्वारा जल का रिसाव कम से कम हो और अधिक से अधिक पानी पौधे को उपलब्ध हो।

यह है फायदा

उत्पादकता और गुणवत्ता टपक सिंचाई में पेड़ पौधों को प्रतिदिन जरूरी मात्रा में पानी मिलता है। इससे उन पर तनाव नहीं पड़ता। फलस्वरूप फसलों की बढ़ोतरी और उत्पादन दोनों में वृद्धि होती है। टपक सिंचाई से फल, सब्जी और अन्य फसलों के उत्पादन में 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है।

  • पानी : टपक सिंचाई द्वारा 30 से 60 प्रतिशत तक सिंचाई पानी की बचत होती है।

  • जमीन : ऊबड़-खाबड़, क्षारीययुक्त, बंजर जमीन, शुष्क खेती वाली, पानी के कम रिसाव वाली जमीन और अल्प वर्षा की क्षारीययुक्त जमीन भी खेती हेतु उपयोग में लाई जा सकती है।

  • रासायनिक खाद : फर्टिगेशन से पोषक तत्व बराबर मात्रा में सीधे पौधों की जड़ों में पहुंचाए जाते हैं, जिससे वजह से पौधे पोषक तत्व का उपयुक्त इस्तेमाल कर पाते हैं। प्रयोग किये गए उर्वरक में होने वाले विभिन्न नुकसान कम होते हैं, जिससे पैदावार में वृद्धि होती है। इस पद्धति द्वारा 30 से 45 प्रतिशत तक रासायनिक खाद की बचत की जा सकती है।

  • खरपतवार : टपक सिंचाई में पानी सीधे फसल की जड़ में दिया जाता है। आस-पास की जमीन सूखी रहने से अनावश्यक खरपतवार विकसित नहीं होते। इससे जमीन के सभी पौष्टिक तत्व केवल फसल को मिलते हैं।

  • कीट और रोग : टपक/इनलाइन पद्धति से पेड़-पौधों का स्वस्थ विकास होता है। जिनमें कीट-रोग से लड़ने की ज्यादा क्षमता होती है। कीटनाशक खर्चे में भी कमी होती है।

  • खर्च और कार्यक्षमता : टपक/इनलाइन सिंचाई पद्धति उपयोग से जड़ के क्षेत्र को छोड़कर बाकी भाग सूखा रहने से निराई-गुड़ाई, खुदाई, कटाई आदि काम बेहतर ढंग से किये जा सकते हैं। इससे मजदूरी, समय और पैसे तीनों की बचत होती है।

टपक सिंचाई प्रणाली के घटक टपक संयंत्र के प्रमुख भाग निम्नानुसार हैं-

  1. हेडर असेंबली

  2. फिल्टर्स - हाइड्रोसाइक्लोन, सैंड और स्क्रीन फिल्टर्स

  3. रसायन और खाद देने के साधन - वेंचुरी, फर्टिलाइजर टैंक

  4. मेनलाइन

  5. सबमेन लाइन

  6. वॉल्व

  7. लेटरल लाइन (पॉलीट्यूब)

  8. एमीटर्स - ऑनलाइन/इनलाइन/मिनी स्प्रिंकलर/जेट्स

संयंत्र की देखभाल

  • हर दिन पंप शुरू करने के बाद, संयंत्र का दबाव स्थिर होने पर सैंड फिल्टर की बैकवॉशिंग करना चाहिए। हाइड्रोसाइक्लोन आरंभिक सफाई के बाद हर 5-6 घंटे या पानी की गुणवत्ता के अनुसार समय-समय पर फिल्टर्स साफ करने चाहिए।

  • फिल्टर की सफाई होने के बाद हेडर असेंबली के बाईपासवॉल्व की सहायता से उचित दाब नियंत्रित करना चाहिए। उपयुक्त दबाव पर चलने वाले संयंत्र से पानी सभी जगह समान मात्रा में मिलता है।

  • खेतों में निरीक्षण करके कहीं टूट-फूट या लीकेज होने पर तुरंत ठीक करवाएं। पाईप मुड़ा हुआ या दबा हुआ हो, तो तुरंत सीधा करें।

  • टपक संयंत्र के सभी ड्रिपर्स से पानी ठीक तरह से गिरता है या नहीं, इसका ध्यान रखना चाहिए।

  • टपक सिंचाई पूर्ण होने के बाद जमीन का गीलापन सभी जगह एक जैसा है या नहीं, यह देखना चाहिए।


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