टमाटर में अगेती झुलसा का बढ़ा खतरा, किसान तुरंत करें ये उपाय
(सभी तस्वीरें- हलधर)यह रोग अल्टनेरिया सोलेनाई नामक फफूंद के कारण होने वाला एक गंभीर रोग है। जो पौधों की पत्तियों, तनों और फलों को प्रभावित करता है। रोग के शुरुआत में पुरानी और निचली पत्तियों पर छोटे भूरे से काले रंग के धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं।
बैल की आँख जैसी आकृति: जैसे-जैसे ये धब्बे बड़े होते हैं (लगभग 1 से 1.5 सेमी), इनके अंदर गोल-गोल गाढ़े छल्ले बन जाते हैं। यह दिखने में बिल्कुल तीरंदाजी के बोर्ड या बैल की आँख जैसा लगता है।
पीला घेरा: इन प्रभावित धब्बों के चारों ओर का हिस्सा चमकदार पीला होने लगता है।
पत्तियों का गिरना: जैसे ही संक्रमण बढ़ता है, धब्बे आपस में मिल जाते हैं, जिससे पूरी पत्ती पीली या भूरी होकर सूख जाती है और गिर जाती है।
तने पर लक्षण: यदि यह संक्रमण छोटे पौधों (पौधशाला) में होता है, तो तने के निचले हिस्से पर सड़न (कॉलर रॉट) पैदा होती है, जिससे पौधा वहीं से टूटकर मर जाता है।
फलों पर लक्षण: यह रोग फलों के डंठल वाले हिस्से (कालीक्स) से प्रवेश करता है। फलों पर काले, धंसे हुए और चमड़े जैसे धब्बे बन जाते हैं, जिन पर बारीक छल्ले साफ देखे जा सकते हैं। इसके कारण कच्चे या पके फल समय से पहले ही सड़कर नीचे गिर जाते हैं।
बचाव और नियंत्रण: खेत में जलभराव न होने दें और पौधों के बीच उचित दूरी रखें ताकि हवा का संचार बना रहे। फसल चक्र अपनाएं और खेत को खरपतवार मुक्त रखें। लक्षण दिखते ही मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 400 ग्राम को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। 10 से 15 दिन के अंतराल पर दोहराएं। अथवा मध्यम आक्रमण पर एजोक्सिस्ट्रोबिन 23 प्रतिशत एससी (1 मिली प्रति लीटर पानी) का उपयोग करें।
सुशीला चौधरी, सुनील कुमार शर्मा, डॉ. बीडीएस नाथावत, मोना यादव, कृषि महाविद्यालय बीकानेर