मेहंदी में पौध संरक्षण: पत्ती भक्षक लट से बचाव के असरदार उपाय

नई दिल्ली 22-Sep-2026 02:32 PM

मेहंदी में पौध संरक्षण: पत्ती भक्षक लट से बचाव के असरदार उपाय

(सभी तस्वीरें- हलधर)

मेहंदी शुष्क और अर्द्धशुष्क क्षेत्रों में बहुवर्षीय फसल के रूप में टिकाऊ खेती के सबसे अच्छे विकल्पों में से एक है। मेहंदी की खेती पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है। प्रदेश में पाली जिले के सोजत और मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र में मेहंदी का व्यावसायिक उत्पादन किया जाता है। यहां करीब 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसल का उत्पादन लिया जाता है। सोजत में मेहंदी की मण्डी, पत्तियों का पाउडर और पैकिंग करने के कई कारखाने हैं। मेहंदी की फसल में दीमक, जड़गलन और दूसरी बीमारियों के कारण पौधे सूख जाते हैं।

पत्ती भक्षक लट

पत्ती लट का प्रकोप होने पर क्यूनालफॉस 25 ईसी 1.0 - 1.50 लीटर दवा 500 से 700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। धूल के रूप में क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 20-25 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करें। जैविक नियंत्रण हेतु भुने हुए बाजरे का चुग्गा खेत में 8-10 जगह स्टैण्ड बनाकर रखें। चुग्गे के आकर्षण से चिड़ियां खेत में आकर लटों को खा जाती हैं।

जड़ गलन

पौध शाला से पौधे उखाड़कर 0.1 प्रतिशत कार्बेन्डाजिम के घोल में जड़ें भिगोकर पौध रोपण करें। खड़ी फसल में 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति लीटर पानी में घोलकर रोग प्रभावित पौधों की जड़ों में डालें।

पत्ती धब्बा

सामान्य से अच्छी वर्षा की स्थिति में पौधों पर पत्ती धब्बा रोग का प्रकोप पाया जाता है। इसके नियंत्रण हेतु 0.2 ग्राम मैन्कोजेब प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

दीमक

दीमक नियंत्रण हेतु कार्बोफ्यूरॉन 3 जी 25 किलो प्रति हेक्टेयर अथवा क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी 4 लीटर प्रति 3200 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

रस चूसक कीट

सफेद मक्खी और हरा तेला आदि रस चूसक कीटों के नियंत्रण हेतु ट्राईजोफॉस 40 ईसी 1.50 लीटर अथवा एसीफेट 75 एसपी 500 ग्राम अथवा डाइमिथोएट 30 ईसी 1 लीटर 500 से 700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।


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