भिंडी में सफेद मक्खी का प्रकोप: समय रहते करें नियंत्रण, वरना फसल...
(सभी तस्वीरें- हलधर)भिड़ी की खेती को मुनाफेदार बनाने के लिए किसानों को विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। क्योंकि इस फसल में लगने वाले कीट से पूरी फसल तबाह हो सकती है। भिंडी की फसल में सफेद मक्खी एक ऐसा ही खतरनाक कीट है, जो पत्तियों से रस चूसकर पौधे को कमजोर कर देती है। यही कीट ‘येलो वेन मोजैक वायरस’ फैलाता है, जिससे पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और फल विकृत होकर बाजार के लायक नहीं रहते। समय पर नियंत्रण नहीं करने पर किसानों को भारी उत्पादन और आय का नुकसान झेलना पड़ सकता है।
ऐसे करें सफेद मक्खी कीट की पहचान
यदि पत्तियों पर पीले धब्बे दिखाई दें, नसें पीली हो जाएं और पौधे की वृद्धि रुकने लगे तो समझ लें कि सफेद मक्खी का प्रकोप शुरू हो चुका है। ऐसे में तुरंत कदम उठाना जरूरी है।
वैज्ञानिक तरीके से पाएं नियंत्रण
किसान भिड़ी की बुवाई के लगभग 25-30 दिन बाद डाइमिथोएट या मिथाइल डिमेटान की 0.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। साथ ही पीले स्टिकी ट्रैप लगाकर भी कीट नियंत्रण में मदद मिलती है। खेत में साफ-सफाई और संतुलित उर्वरक उपयोग से भी प्रकोप कम किया जा सकता है।
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