युद्ध का असर: तेल की बढ़ती मांग से सरसों में तेजी, किसानों को राहत लेकिन आगे...

नई दिल्ली 25-Mar-2026 06:56 PM

युद्ध का असर: तेल की बढ़ती मांग से सरसों में तेजी, किसानों को राहत लेकिन आगे...

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब घरेलू तेल बाजार पर साफ दिखने लगा है। पाम और सोयाबीन तेल का आयात लगभग ठप होने से सरसों तेल की मांग तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा फायदा ख़ासकर राजस्थान के किसानों को मिल रहा है। सरसों तेल की बढ़ती मांग से बाजार में सरसों के दाम बढ़कर करीब 6800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। 

राजस्थान बना केंद्र, किसानों को मिल रहा बेहतर भाव

देश के कुल सरसों उत्पादन में करीब 50% योगदान देने वाला राजस्थान इस समय केंद्र में है। अलवर, भरतपुर, झुंझुनूं, सीकर, करौली और दौसा जैसे जिलों में किसान अपनी उपज सीधे मंडियों में बेच रहे हैं। अच्छी पैदावार और इस बार सरसों में 42-43% तक तेल की मात्रा मिलने से किसानों की आमदनी और बढ़ी है। 

भविष्य को लेकर चिंता भी बरकरार

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो सरसों के दाम और बढ़ सकते हैं, लेकिन जैसे ही विदेशी तेल का आयात शुरू होगा, बाजार में गिरावट आ सकती है। ऐसे में किसानों के लिए यह स्थिति अवसर के साथ जोखिम भी लेकर आई है।

आम जनता पर पड़ सकता है असर

देश में विदेशी पाम और सोयाबीन तेल की सप्लाई बाधित रहने से आने वाले समय में सरसों तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ना तय है।


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