फसल पीली पड़ रही है? जड़ों में छिपा है यह खतरनाक दुश्मन!
(सभी तस्वीरें- हलधर)भूमिगत शत्रु सूत्रकृमि
फसल में बहुत से ऐसे कीड़े लगते है, जो आंखो से दिखाई नहीं देते है। सूत्रकृमि भी ऐसा ही कीट है। यह पौधे के जड़ क्षेत्र में रहता है। साथ ही, पौधे की जड़ में घुसकर अपनी वंश वृद्धि करता है। इसकी मादा एक साथ लाखों की संख्या में अण्डे देती है। इस कारण फसल जड़ क्षेत्र में सूत्रकृमि की संख्या काफी तेजी से बढ़ती है। संरक्षित फसल में इस कीट का प्रकोप ज्यादा होता है। इसके अलावा हजारा, बैंगन, अनार, अमरूद, जैतून सहित दूसरी फसल में भी यह कीट पाया जाता है। कीट के प्रकोप से फसल नष्ट हो जाती है। इससे किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। सूत्रकृमि को फसल का भूमिगत शत्रु भी कहा जाता है।
सूत्रकृमि क्या है?
सूत्रकृमि एक परजीवी होता है इन्हें गोल कृमि अथवा धागा कृमि भी कहा जाता है। इन्हें केवल माईक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है। इनकी प्रजातियां पौधों की जड़ और उसके भूमिगत भाग पर ही पलती है। जड़ों को भेदकर उनमें गांठ बनाने वाले सूत्रकृमियों की संख्या ज्यादा होती है। सूत्रकृमि स्वयं भरण करके, पौधों में कार्यिकीय विकृतियां उत्पन्न करके पौधों को कमजोर बनाती है और आर्थिक क्षति पहुँचाती है।
नुकसान ऐसे
पौधे में सूत्रकृमि जाइलम और फ्लोएम में घर बना लेता है। पौधे को खाना पानी इसी से मिलता है। सूत्रकृमि पौधे में उपस्थित पोषक पदार्थों का अवशोषण कर लेता है जिससे पौधा कमजोर पड़कर सूख जाता है। जिस फसल में सूत्रकृमि ज्यादा होते हैं, वहां फफूंदी, जीवाणु और कीट प्रकोप भी ज्यादा होता है।
सूत्रकृमि के लक्षण
पौधे की वृद्धि रूक जाना।
पौधों में प्रबलता की कमी।
पौधे का विकृत होना।
तना और जड़ में विकार।
फूल विकास में रुकावट।
बचाव के उपाय
रोग ग्रसित जड़ को उखाड़कर जला दें।
पौधा पीला दिखाई दे तो जड़ उखाड़कर गांठ को देखें।
गांठ दिखाई देने पर प्रभावित खेत से दूसरे खेत में पानी नहीं ले जाएं।
प्रभावित खेत में चारा फसल की बुआई करें।
खेत का सौरीकरण करें।
फसल चक्र अपनाये।
बुवाई से पूर्व खेत में 250 किग्रा प्रति एकड नीम की खली को मिट्टी में मिलायें।