तिल की खेती में अपनाएं ये फॉर्मूला, बढ़ेगी आय दोगुनी

नई दिल्ली 18-Jun-2026 03:44 PM

तिल की खेती में अपनाएं ये फॉर्मूला, बढ़ेगी आय दोगुनी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

तिल की उन्नत खेती

तिल छोटे काले और सफेद दानों वाला एक तिलहन है। इसका उत्पादन बीज के लिए किया जाता है। यह कम और मध्यम वर्षा वाले क्षेत्रों की बारानी फसल है। गहरी और अच्छी जलधारण क्षमता वाली हल्की से भारी मिट्टी, जिसमें जल निकास की सुविधा हो, इसके लिए उपयुक्त है।

  • उन्नत किस्में:- सी-50, आरटी 46, 103,125,127, 346, 351। आरटी-54 (हल्के भूरे रंग की किस्म)

  • खेत की तैयारी:- वर्षा के साथ 1-2 जुताई कर खेत तैयार करें। 20-25 गाड़ी गोबर की खाद प्रति हैक्टेयर मिट्टी में मिलाएं।

  • बुवाई समय:- जून-जुलाई तक।

  • बीज का उपचार:- 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किग्रा. बीज।

  • बीज दर:- 4-5 किग्रा प्रति हैक्टेयर।

  • कतार से कतार की दूरी:- 30 सेंमी.

  • पौधे से पौधे की दूरी:- 10 सेंमी।

  • अंतराशस्य:- तिल को ग्वार, मूँग अथवा बाजरे के साथ कतारों में सहफसली रूप में लिए जाने पर अधिक आमदनी मिलती है।

  • उर्वरक:- नत्रजन-फॉस्फोरस 20 किग्रा.(हल्की मिट्टी)। दूसरे क्षेत्रों में नत्रजन 40 किग्रा, फास्फोरस 25 किग्रा प्रति हैक्टेयर डालें। नत्रजन 25 प्रतिशत मात्रा फसल के 30-35 होने पर उपयोग


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