तारामीरा के भाव में तेजी किसानो को मिलेगा पूरा फायदा

नई दिल्ली 23-Jun-2026 03:31 PM

तारामीरा के भाव में तेजी किसानो को मिलेगा पूरा फायदा

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। प्रदेश के किसान इन दिनों खरीफ फसल बुवाई की तैयारी में जुटे है। फसल बुवाई के लिए बीज खाद की खरीद कर रहे है। लेकिन, बाजार कुछ और ही कहानी कह रहा है। प्रदेश की कृषि उपज मंडियो में सरसों के साथ-रााथ तारामीरा की जिंस भी छलांग मारती नजर आ रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि तारामीरा भी तिलहनी फसल है। लेकिन, दैनिक खान-पान में इसका सरसों जितना उपयोग नहीं है। लेकिन, इस फसल की इंडस्ट्रीज मांग अधिक है। क्योंकि, यह दूसरी फसल की तुलना में सस्ती है। शायद यही कारण है कि सरसों के दामों में उछाल आने से इसके प्रति क्विंटल भाव में भी तेजी दर्ज होने लगी है। गौरतलब है कि भरतपुर, अलवर लाइन की कृषि उपज मंडियों में 42 प्रतिशत तेल कंड़ीशन सरसों के प्रति क्विंटल भाव 7700-8000 रूपए बोले जा रहे है। जबकि, पश्चिमी राजस्थान की मंडियों में तारामीरा के भाव 600-6500 रूपए प्रति क्विंटल तक जा पहुंचे है। जो महीनेभर पहले 4000-4200 रूपए प्रति क्विंटल चल रहे थे।

यह है उपयोग

तारामीरा के बीज का उपयोग तेल निकालने में किया जाता है, जो खाने योग्य होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। लेकिन, इसके तेल का ज्यादा उपयोग साबुन, कॉस्टमेटिक और आयुर्वेदिक इंड़स्ट्रीज में किया जाता है। तेल निकालने के बाद बचा खली पशुओं के लिए बेहद पौष्टिक मानी जाती है।

तारामीरा से सस्ते कई विकल्प

तारामीरा के  भावों में आए उछाल को लेकर सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अशोक शर्मा का कहना है कि सरसों तेल में तारामीरा तेल मितावट की बात सही नहीं है। क्योंकि, बाजार में इससे सस्ते कई विकल्प मौजूद है। लेकिन, यह भी सरसों जैसी फसल है। इस कारण सरसों का बाजार तेज रहने पर इसके प्रति क्विंटल भाव में बढौत्तरी संभव है। बता दें कि तारामीरा को लेकर कहा जाता है कि इसको सरसों तेल के साथ मिलाने से झाल (चरपराहट) ज्यादा देखने को मिलती है।


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