बाजरे की फसल में कीट-रोग का खतरा, किसान तुरंत करें ये काम
(सभी तस्वीरें- हलधर)बाजरे की खेती का हमेशा से विशेष स्थान रहा है। किसी भी फसल से अच्छा उत्पादन लेने के लिए उसे कीट-रोग से मुक्त रखना आवश्यक होता है। इस फसल में बरसात और सिट्टे बनने तक कीट-रोग का प्रकोप होता है। इनके कारण फसलों की वृद्धि और विकास पर तो असर पड़ता ही है, साथ ही फसल कमजोर भी हो जाती है। इससे उत्पादन में कमी आती है।
सफेद लट: नियंत्रण हेतु क्विनालफॉस 5 प्रतिशत कण अथवा कार्बोफ्यूरोन 3 प्रतिशत कण 25 किलो प्रति हैक्टेयर की दर से काम में लेवें अथवा 4 लीटर क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी प्रति हैक्टेयर की दर से सिंचाई पानी के साथ देना चाहिए।
बालों वाली सुण्डी: 500 मिली क्यूनालफॉस 25 ईसी को 250 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें।
रूट बग: 15-20 दिन की फसल में रूट बग नियंत्रण हेतु फ्यूराडॉन 20-25 किलो प्रति हैक्टेयर की दर से बुरकाव करें।
पत्ती भक्षक कीट: नियंत्रण हेतु क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 25 किलो प्रति हैक्टेयर की दर से बुरकाव करें अथवा 1 लीटर क्यूनालफॉस 25 ईसी का 500-700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
रोग (जोगिया अथवा हरी बालों वाला रोग, स्मट): बुवाई के 21 दिन बाद मैंकोजेब 2 किलो पाउडर प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़कें।
अरगट: नियंत्रण के लिए सिट्टे निकलते समय कार्बोरिल 5 प्रतिशत चूर्ण का 25 किलो प्रति हैक्टेयर की दर से बुरकाव करें।