वैज्ञानिक तरीके से अरंडी की खेती, पाएं बंपर पैदावार और अधिक मुनाफा
(सभी तस्वीरें- हलधर)अरंडी की खेती राजस्थान में मुख्यतः जालौर, सिरोही, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर और बीकानेर जिलों में की जाती है। इसके तेल की अत्यधिक मांग से अरंडी के बाजार भाव अच्छे रहते हैं। प्रदेश में अरंडी की खेती का क्षेत्रफल पिछले वर्षों में काफी बढ़ा है। अच्छे फसल प्रबन्धन को अपनाकर सिंचित परिस्थिति में अरंडी की 3500-4000 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर उपज ली जा सकती है।
उन्नत किस्में:- जीसीएच-4, जीसीएच-5, राजस्थान संकर अरंडी-1, डीसीएस- 9 (ज्योति), जीसीएच- 7 खेत की तैयारी:- दो अच्छी जुताई। बीज दर:- 12-15 किलोग्राम बीज प्रति है। चौभ कर बुवाई करने पर 6-8 किग्रा बीज प्रति हैक्टर।
बुवाई सिंचित क्षेत्र में कतार और पौध की दूरी:- 90-120 गुणा 60 सेमी असिंचित क्षेत्र में - 60 गुणा 45 सेमी। गहराई- 5 सेमी। बुवाई समय- जुलाई से अगस्त प्रथम सप्ताह तक। बीज उपचार- 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किग्रा बीज।
अरंडी में अन्तराशस्य अरंडी की फसल में मूंग और मोठ की एक कतार से अधिक आमदनी प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए अरंडी को 120 सेन्टीमीटर पर लाइन में बुवाई करे। अरंडी की दो लाइन के बीच एक लाइन मूंग अथवा मोठ की जल्दी पकने वाली किस्म की बुवाई करें। मूंग के लिए के-851, आरएमजी-62 और मोठ के लिए आरएमओ-40, 257 किस्म का चुनाव करें।