जाने बाजरे की उपज बढ़ने का वैज्ञानिक तरीका

नई दिल्ली 25-Jun-2026 03:58 PM

जाने बाजरे की उपज बढ़ने का वैज्ञानिक तरीका

(सभी तस्वीरें- हलधर)

ऐसे मिलेगा बाजरे का ज्यादा उत्पादन

मानसून की सुबुगाहट के साथ ही किसानों ने फसल बुवाई के लिए खेत तैयार करने शुरू कर दिए हैं। खरीफ में बाजरे की बारानी क्षेत्र की प्रमुखता से बुवाई होती है। औसतन 40-42 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल में बाजरे की बुवाई किसान करते हैं। क्योंकि, इस फसल से दाना और चारे की पूर्ति होती है। इसकी ज्यादा पैदावार लेने के लिए किसान बुवाई पूर्व इन बातों का ध्यान रखें।

इन बातों का रखें ध्यान

  • गुन्दिया अथवा चेपा रोग से बचने हेतु बीज को नमक के 20 प्रतिशत (1 किलो नमक प्रति 5 लीटर पानी) घोल में लगभग 5 मिनट तक डुबोकर हिलाएं। तैरते हुए हल्के बीज और कचरे को जला दीजिए। शेष बचे हुए बीजों को साफ पानी से धोकर अच्छी प्रकार छाया में सुखाने के बाद बोने के काम में लेवें। उपरोक्त उपचार के बाद प्रति किलो बीज का 3 ग्राम थायरम दवा से उपचार करें।

  • दीमक की रोकथाम हेतु 4 मिली लीटर क्लोरोपायरीफॉस 20 ई.सी. अथवा 10 मिली लीटर इमिडाक्लोप्रिड 600 एफ.एस. प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार करें।

  • क्षारीय- लवणीय मिट्टी में बोने से पहले बाजरे के बीज को एक प्रतिशत सोडियम सल्फेट में 12 घंटे तक भिगोकर साफ पानी में धोकर छाया में सुखाने के बाद बीज को कवकनाशी से उपचारित कर बोएं।

  • बारानी खेती के अंतर्गत बाजरे के बीज को सैलिसिलिक अम्ल द्वारा 100 पीपीएम में 4 घंटे डुबोकर बुवाई करने और दाना बनने की अवस्था में एक पर्णीय छिड़काव करने से उपज में वृद्धि होती है।

राजस्थान बाजरा की खेती में देश के प्रथम पायदान पर है। लेकिन, उत्पादकता दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम है। उन्नत किस्म और शस्य क्रियाओं को अपनाकर राजस्थान में बाजरे की उत्पादकता 3 से 6 गुना तक बढ़ाई जा सकती है। बाजरे का लगभग 95-97 प्रतिशत क्षेत्र बारानी खेती में आता है।

बाजरे की उत्पादकता बढ़ाने और पैदावार में स्थिरता लाने के लिए मरू क्षेत्र में की जाने वाली बारानी खेती पर विशेष ध्यान देना होगा। गौरतलब है कि कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर ने गत वर्ष से संकर बाजरा बीजोत्पादन लेना शुरू किया है। साथ ही, बीजोत्पादन में क्षेत्रीय किसानों की सहभागिता को बढ़ावा दे रहा है।

खेती की बारीकियाँ

  • भूमि:- हल्की रेतीली से भारी चिकनी मिट्टी

  • बुवाई का समय:- मध्य जून से जुलाई तीसरे सप्ताह तक। देरी से बुवाई करने पर बारानी फसल में 4 से 50 किग्रा. प्रति है. पैदावार में कमी।

  • उन्नत किस्म:- एचएचबी-67 (इम्प्रूव्ड), एचएचबी-299, एमपीएमएच-17, आरएचबी-228, 223, 177 (निजी बीज प्रदाता कंपनियां भी बाजरे की संकर किस्म का बीज उपलब्ध करवा रही हैं। बीज खरीद का बिल जरूर लें)।

  • खेत की तैयारी:- पहली वर्षा होते ही खेत की अच्छी जुताई कर शीघ्र बुवाई करें। प्रति हेक्टेयर 4-5 टन सड़ी हुई गोबर खाद का उपयोग करें।

  • भूमि उपचार:- दीमक और दूसरे भूमिगत नाशी कीट की रोकथाम के लिए आखिरी जुताई के समय क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति है. और सफेद लट नियंत्रण के लिए फोरेट 10 प्रतिशत कण अथवा कार्बोफ्यूरान 3 प्रतिशत कण 25 किग्रा. प्रति है. की दर से डालें।

  • बीज की मात्रा:- 4-5 किलो प्रति हेक्टेयर

  • बीजोपचार:- गुन्दियाँ अथवा अरगट रोग नियंत्रण हेतु 5 लीटर पानी में एक किग्रा नमक घोलकर बीज को पांच मिनट डुबोकर हिलायें, तैरते हुए हल्के बीज और कचरे को निकाल कर जला दें। शेष बीज को साफ पानी से धोकर छाया में सुखायें। बीज को 3 ग्राम थायरम प्रति किग्रा बीज की दर से उपचारित करें।

  • दीमक के लिए:- 10 मिली इमिडाक्लोप्रिड 600 एफएस से प्रति किलो बीज को उपचारित करें।

  • क्षारीय और लवण भूमि के लिए:- बुवाई पूर्व बीज को एक प्रतिशत सोडियम सल्फेट में 12 घंटे भिगोकर साफ पानी से धोकर और सुखाने के बाद बीज को कवकनाशी से उपचारित करके बुवाई करें।

  • कतार की दूरी:- 45-60 सेमी

  • बीज की गहराई:- 3-4 सेमी

  • पपड़ी बनना:- खेत में कठोर पपड़ी बनने (रोड होने) की समस्या के हल हेतु 5 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर की दर से बाजरे की कतारों (कुड़ों) में डालें अथवा बुवाई के समय 4 से 6 किग्रा वजन रबर के पहिये ट्रैक्टर के पीछे कतार में चलाने (कॉम्पेक्शन तकनीक) से पैदावार में वृद्धि होती है।

  • अन्तराशस्य:- बाजरा उत्पादन में वृद्धि, स्थायित्व के लिए मोठ की आरएमओ-435 और दूसरी किस्म को 2:4 (बाजरा: मोठ) अनुपात में बुवाई करें।

 


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