मिर्च में कीट-रोग नियंत्रण के आसान और प्रभावी उपाय

नई दिल्ली 18-Jun-2026 12:53 PM

मिर्च में कीट-रोग नियंत्रण के आसान और प्रभावी उपाय

(सभी तस्वीरें- हलधर)

मिर्च में समन्वित नाशीजीव प्रबंधन

मसाला फसल हैं शामिल मिर्च एक नकदी फसल है। मिर्च हमारे भोजन का प्रमुख अंग है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इसमें विटामिन ए और सी पाये जाते है और कुछ खनिज लवण भी होते है। मिर्च का उपयोग हरी और लाल दोनों अवस्थाओं में किया जाता है। इसे कच्चा सलाद, के रूप में, अचार बनाकर, पकी लाल मिर्च का सुखाकर मसालों के रूप में और हरी मीठी मिर्च को सब्जी के लिए प्रयोग में लाते है। मिर्च की फसल पूरे वर्ष ली जा सकती है। मिर्च के उत्पादन में वृद्धि और स्थायित्व में अस्थिरता के लिए मुख्य रूप से नाशीजीवों का आक्रमण और रोगों का प्रकोप काफी हद तक जिम्मेदार है। ये नाशीजीव मिर्च में 20 से 90 प्रतिशत तक उपज में हानि पहुँचाते हैं। कीट- पतंगों द्वारा होने वाले नुकसान को उचित प्रबंधन तरीकों को अपनाकर काफी हद तक कम किया जा सकता हैं।

हानिकारक कीट-रोग

थ्रिप्स, माइट, माहू, फल छेदक, सफेद मक्खी, कटुआ इल्ली, सफेद लट। रोग:- आर्द्रगलन, चूर्णिल आसिता, श्यामव्रण, जीवाणु धब्बा, पर्णकुंचन और मोजेक रोग।

जैविक नियंत्रण

  • मित्र कीटों को पहचानकर इनका संरक्षण करना चाहिए। जैसे मकड़ी, मक्खी, बग, प्राइडरस, प्रेइंगमेन्टिस, ट्राइकोग्रामा क्राइसोपर्ला, शिकारी मक्खी, टाइगर बीटल कैराविड बीटल, मिरिड बग, लेडी बर्ड बीटल, ड्रैगनफ्लाई परभक्षी झींगुर, मीडोग्रास होपर इत्यादि। 

  • मिर्च में माहू के नियंत्रण के लिए परभक्षी कीट क्राइसोपर्ला के 18 से 20 हजार ग्रब प्रति एकड़ की दर पूरे खेत में छोड़ना चाहिए।

  •  फसल में लगने वाली हानिकारक सूंडियों को मारने के लिए बैसिलस, थुरेंजिएन्सिस (बी.टी.) 1-1.5 मिली. ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

  •  फसल में लगने वाली इल्लियों, सूंडियों और चूसक कीटों के नियंत्रण के लिए ब्युवेरिया बैसियाना का उपयोग 1-1.5 मिली. प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।

  •  ट्राइकोडर्मा से बीज का उपचार 4-5 ग्राम प्रति किग्रा. बीज की दर से उपचारित करके ही बुवाई करें।

रासायनिक नियंत्रण

  • थ्रिप्स, माहू, सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए थायोमियोक्साम 25 डब्ल्यूजी 3 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी में अथवा इमीडाक्लोप्रिड 0.3 मिली. प्रति लीटर पानी अथवा डायमेथोएट 30 ईसी. 2 मिली प्रति लीटर पानी अथवा एसिटामिप्रिड 0.2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। 

  • माइट नियंत्रण के लिए डायकोफाल 2.5 मिली अथवा ओमाइट 3 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। 

  • फल छेदक, कटुआ इल्ली और सफेद लट के नियंत्रण के लिए क्यूनालफॉस 25 ईसी 2 मिली. अथवा क्लोरोपायरीफॉस 1 मिली. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। 

  • हानिकारक कीट जैसे बेधक और कुतरने वाले इत्यादि के नियंत्रण के लिए नीम का अर्क 4 मिली. अथवा नीम तेल 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें। 

  • आर्द्रगलन, एन्थ्रेक्नोज उकटा और फल गलन रोग नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। 

  • चूर्णिल आसिता नियंत्रण के लिए कैराथेन 0.1 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए। 

  • पर्ण कुंचन और दूसरे विषाणु जनित रोग नियंत्रण के लिए डायमिथोएट 2 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

  • जीवाणु म्लानि और जीवाणु पत्ती धब्बा रोग नियंत्रण के लिए प्लांटोमाइसिन 2 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

  • सभी प्रकार के रसायनों का छिड़काव सुबह अथवा शाम के समय ही करना चाहिए।


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