धान में डेड हार्ट का खतरा बढ़ा, वैज्ञानिकों ने जारी की एडवाइजरी 

नई दिल्ली 08-Sep-2026 12:44 PM

धान में डेड हार्ट का खतरा बढ़ा, वैज्ञानिकों ने जारी की एडवाइजरी 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। धान की फसल में तना छेदक कीट (स्टेम बोरर) का खतरा बढ़ने लगा है। इसे देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। ताकि, फसल को नुकसान से बचाया जा सके। बता दें कि यह कीट नर्सरी से लेकर बालियां निकलने तक फसल को नुकसान पहुंचाता है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। शुरुआती अवस्था में इसकी सुंडी धान के तने के अंदर घुसकर उसे भीतर से खा जाती है। इससे पौधा सूख जाता है और हल्के से खींचने पर आसानी से बाहर निकल आता है। बाद में जब बालियां निकलती हैं, तो प्रभावित पौधों में बिना दाने वाली सफेद बालियां दिखाई देती हैं। इसे डेड हार्ट की स्थिति कहा जाता है, जो पैदावार में भारी कमी का कारण बनती है।

ऐसे करें पहचान

शुरुआती अवस्था में पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। पौधे के तने के निचले हिस्से में छोटे छेद दिखाई दे सकते हैं। अंदर का हिस्सा खोखला हो जाता है। यदि प्रकोप फसल की बालियां निकलने की अवस्था में होता है तो बालियां सफेद होकर सूख जाती हैं। इसलिए खेत में अचानक सफेद बालियां नजर आएं तो किसान तुरंत पौधों और तनों की जांच करें।

यह करें किसान

तना छेदक की रोकथाम के लिए क्लोरपायरीफास 50 प्रतिशत + साइपरमेथ्रिन 5 प्रतिशत का 50 मिली प्रति टंकी पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

नहीं दें ज्यादा यूरिया

वैज्ञानिकों ने किसानों को धान में आवश्यकता से अधिक उर्वरक, खासकर नाइट्रोजन का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी है। खेत में लंबे समय तक अधिक पानी भरा रहने से भी कीटों के प्रकोप की स्थिति बन सकती है। इसलिए किसान संतुलित उर्वरक का इस्तेमाल करें और खेत में उचित जल निकासी बनाए रखें।


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