हनुमानगढ़ में पोटाश भंडार की वैज्ञानिक खोज शुरू

नई दिल्ली 23-Sep-2026 01:03 PM

हनुमानगढ़ में पोटाश भंडार की वैज्ञानिक खोज शुरू

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर । देश में पहली बार किसी कॉरपोरेट कंपनी ने कंपोजिट लाइसेंस के तहत पोटाश के वैज्ञानिक अन्वेषण का काम शुरू किया है। महारत्न कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने हनुमानगढ़ जिले के जोड़कियां-सतीपुरा-खुंजा अमलगमेटेड पोटाश एवं हैलाइट ब्लॉक में इस अभियान की शुरुआत की है। केंद्र सरकार की प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रक्रिया के जरिए कंपनी को यह 16.99 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मिला है।

भूमिगत भंडार का होगा 3डी सर्वे

अन्वेषण के दौरान भूमिगत पोटाश संसाधनों की विस्तृत मैपिंग की जाएगी। साथ ही भंडार की गहराई, विस्तार और 3डी संरचना का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। कंपनी यूएनएफसी फ्रेमवर्क के तहत G2 स्तर का अन्वेषण करेगी। इसके अलावा हाइड्रोजियोलॉजिकल और जियोटेक्निकल अध्ययन भी किए जाएंगे। इन जांचों से क्षेत्र में उपलब्ध पोटाश की वास्तविक मात्रा और भविष्य में उसके व्यावसायिक दोहन की संभावनाओं का पता चलेगा।

आयात पर निर्भरता घटाने की उम्मीद

ऑयल इंडिया ने इस पहल को ‘पोटाश हमारी भूख को मिटा सकती है’ टैगलाइन दी है। कंपनी के अनुसार देश में उपलब्ध पोटाश संसाधनों की पहचान और उनका विकास लंबे समय में उर्वरक जरूरतों को पूरा करने में मददगार हो सकता है। भारत में पोटाश आधारित उर्वरकों की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है। ऐसे में घरेलू संसाधनों का विकास होने पर आयात पर निर्भरता कम करने की संभावनाएं बन सकती हैं।

फसल उत्पादन में पोटाश की अहम भूमिका

पोटाश कृषि के लिए महत्वपूर्ण खनिज उर्वरक है। इसमें मौजूद पोटेशियम पौधों की वृद्धि, जड़ों के विकास, जल उपयोग दक्षता, फसल की गुणवत्ता और प्रतिकूल परिस्थितियों में सहनशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गेहूं, धान, कपास, गन्ना, मक्का, दलहन, तिलहन तथा फल-सब्जियों जैसी अनेक फसलों में पोटाश आधारित उर्वरकों का उपयोग किया जाता है।

कनाडा दुनिया में सबसे बड़ा उत्पादक

वैश्विक स्तर पर कनाडा पोटाश उत्पादन में अग्रणी है। सस्केचेवान क्षेत्र में पोटाश के बड़े भंडार हैं और यहां बड़े पैमाने पर खनन किया जाता है। रूस, चीन और बेलारूस भी प्रमुख पोटाश उत्पादक देशों में शामिल हैं। पोटाश की उपलब्धता और कीमत का सीधा संबंध कृषि लागत से है, इसलिए हनुमानगढ़ में शुरू हुआ यह अन्वेषण देश के लिए घरेलू उर्वरक संसाधनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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