किसानों के खेतों में पहुंचेगा वैज्ञानिक दल, मिट्टी से पराली तक होगी जांच
किसानों के खेतों में पहुंचेगा वैज्ञानिक दल, मिट्टी से पराली तक होगी जांच
(सभी तस्वीरें- हलधर)नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में कृषि भवन में मंत्रालय की पहली समग्र मासिक समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में कृषि योजनाओं की प्रगति, किसानों को आर्थिक सहायता, डिजिटल कृषि, प्राकृतिक खेती, दलहन-तिलहन उत्पादन और फसल बीमा सहित विभिन्न मुद्दों की समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव दिखाई देना चाहिए।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि खेतों की मिट्टी की सेहत सुधारने, पराली प्रबंधन और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 22 अक्टूबर से देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया जाएगा। अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ और मैदानी कर्मचारी सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचेंगे। किसानों को मिट्टी की जांच, जैविक तत्वों के संरक्षण, पराली नहीं जलाने और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी।
10.77 करोड़ किसानों की बनी फार्मर आईडी
बैठक में डिजिटल कृषि मिशन की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया गया कि देश में 14 करोड़ किसानों के डिजिटल एकीकरण के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 10.77 करोड़ से अधिक फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं। वहीं, चालू खरीफ सीजन में 26.73 करोड़ से अधिक खेतों का डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरा किया गया है। मंत्री ने धीमी प्रगति वाले राज्यों में विशेष शिविर लगाकर किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के निर्देश दिए।
दलहन और तिलहन उत्पादन में लक्ष्य से आगे देश
राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत वर्ष 2025-26 में 266 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 274.09 लाख टन दलहन उत्पादन हुआ। इसी प्रकार, तिलहन उत्पादन 427 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 430.59 लाख टन दर्ज किया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश को खाद्य तेलों और दालों में आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों को बेहतर तकनीक और बाजार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
प्राकृतिक खेती से जुड़े 27.32 लाख किसान
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत अब तक 27.32 लाख किसान जुड़ चुके हैं और 12.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को इसके दायरे में लाया गया है। अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए 33 हजार से अधिक कृषि सखियों और सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों को तैनात किया गया है। वहीं, बागवानी क्षेत्र में 370.84 मिलियन टन उत्पादन दर्ज किया गया, जबकि किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) से 30.11 लाख किसान जुड़े हैं।
फसल बीमा में 23 प्रतिशत की वृद्धि
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत चालू खरीफ सीजन में किसानों का नामांकन पिछले खरीफ के 2.30 करोड़ से बढ़कर 2.83 करोड़ हो गया है। बीमित क्षेत्र 2.97 करोड़ हेक्टेयर और बीमित राशि 1.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फसल बीमा दावों का निस्तारण पारदर्शी तरीके से किया जाए और किसानों की शिकायतों का निर्धारित समय में समाधान सुनिश्चित हो।
1.01 लाख करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत
कृषि अवसंरचना कोष के तहत 2.25 लाख से अधिक परियोजनाओं के लिए 1,01,502 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। इनसे वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र और कस्टम हायरिंग सेंटर जैसी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत वर्ष 2026-27 में अब तक 664 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
सुस्त राज्यों और जिलों को सख्त निर्देश
शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं की प्रगति की हर महीने समीक्षा की जाए और वित्तीय एवं भौतिक लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों और जिलों में योजनाओं का क्रियान्वयन धीमा है, वहां प्रशासनिक स्तर पर सुधार किया जाए। जरूरत पड़ने पर वे स्वयं संबंधित मुख्यमंत्रियों से बातचीत करेंगे।
मंत्री ने कृषि विज्ञान केंद्रों, आत्मा योजना और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों को एक टीम के रूप में काम करने पर जोर दिया, ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता छोटे और सीमांत किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना तथा कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, तकनीक आधारित और आत्मनिर्भर बनाना है।