मंडियों में मूंग की आवक तेज, एमएसपी से नीचे बिक रही उपज

नई दिल्ली 29-Sep-2026 05:18 PM

मंडियों में मूंग की आवक तेज, एमएसपी से नीचे बिक रही उपज

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। राजस्थान की मंडियों में मूंग की आवक शुरू होने के बावजूद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने आरोप लगाया कि मंडियों में मूंग के भाव घोषित एमएसपी से काफी नीचे चल रहे हैं। अब तक किशनगढ़, केकड़ी और मेड़ता मंडियों में करीब 45 हजार क्विंटल मूंग की आवक हो चुकी है। किसानों को प्रति क्विंटल 1,280 से 3,200 रुपए तक का नुकसान होने का दावा करते हुए कहा कि सरकार को किसानों को घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाना चाहिए। रामपाल जाट के अनुसार केंद्र सरकार ने मूंग का एमएसपी 8,780 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया है। जबकि, मंडियों में किसानों को 5,500 से 7,500 रुपए प्रति क्विंटल तक ही भाव मिल रहे हैं। इस अंतर के चलते किसानों को प्रति क्विंटल 1,280 से 3,280 रुपए तक कम दाम मिल रहे हैं। 45 हजार क्विंटल की अब तक हुई आवक के आधार पर यह नुकसान करीब 5.76 करोड़ से 14.76 करोड़ रुपए तक बैठता है।

सितंबर से हो खरीद

किसान महापंचायत का कहना है कि पिछले कई वर्षों से किसान मूंग की सरकारी खरीद 1 सितंबर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में राज्य और केंद्र सरकार को कई बार ज्ञापन दिए गए हैं। सरकारों के साथ हुई वार्ताओं में भी खरीद समय पर शुरू करने का आग्रह किया गया। लेकिन, अब तक सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है।

भावांतर का लाभ देने की मांग

किसान महापंचायत अध्यक्ष ने कहा कि सरकार किसानों की समृद्धि के लिए लगातार घोषणाएं करती है। राजस्थान सरकार भी खुद को किसानों के प्रति समर्पित बताती है। लेकिन, एमएसपी पर खरीद शुरू नहीं होने से किसानों को घोषित मूल्य नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास एमएसपी पर खरीद के अलावा भावांतर भुगतान योजना का विकल्प भी मौजूद है। इसके बावजूद किसानों को कम कीमत पर उपज बेचने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

मिले खरीद की गारंटी

जाट ने कहा कि केंद्र और राज्य में डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद किसानों को घोषित एमएसपी से वंचित होना दुखद आश्चर्य है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 से देश के किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य की सुनिश्चित प्राप्ति के लिए खरीद की गारंटी का कानून बनाने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। 


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