पशुओं में असंतुलित आहार से हो जाती है ये समस्या, ऐसे बढाएं पौष्टिकता

नई दिल्ली 31-Mar-2026 06:48 PM

पशुओं में असंतुलित आहार से हो जाती है ये समस्या, ऐसे बढाएं पौष्टिकता

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पशुपालन में अधिक मुनाफा पाने के लिए पशुओं का संतुलित आहार बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, असंतुलित आहार के कारण पशु अपनी आनुवंशिक क्षमता के अनुसार दूध उत्पादन नहीं कर पाते हैं। इसके साथ ही दुग्ध-काल छोटा हो जाता है और दो ब्यांत के बीच अंतराल बढ़ जाता है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। असंतुलित पोषण की वजह से पशुओं की प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है। कई बार पशुओं में उपापचयी (मेटाबॉलिक) बीमारियां जैसे मिल्क फीवर और कीटोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा पशुओं का शारीरिक विकास धीमा पड़ जाता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है।

पशु चारे की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए करें ये काम

हरे चारे की कमी के कारण पशुओं की निर्भरता सूखे और रेशेदार चारे पर बढ़ जाती है। ऐसे में सूखे चारे की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कुछ उपाय अपनाना जरूरी है —

सूखे चारे में यूरिया घोल या यूरिया-शीरा मिश्रण मिलाकर उसकी पोषकता बढ़ाई जा सकती है। खनिज तत्वों की पूर्ति के लिए खनिज तरल मिश्रण और यूरिया शीरा खनिज ब्लॉक का उपयोग करना लाभकारी होता है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पेड़ों की पत्तियां जैसे अरडू, खेजड़ी, बबूल, पीपल, नीम, गूलर, बरगद और शहतूत पशुओं को खिलानी चाहिए। सरसों की पत्ती और अन्य हरे चारे को सूखी घास व कडबी के साथ मिलाकर कुट्टी बनाकर खिलाने से चारे की बर्बादी कम होती है और पोषण बेहतर मिलता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पशुओं को प्रतिदिन लगभग 50 ग्राम मिनरल मिक्सचर पाउडर देना चाहिए, जिससे उनके शरीर में आवश्यक खनिजों की पूर्ति हो सके और दूध उत्पादन में बढ़ोतरी हो। यदि पशुपालक संतुलित आहार और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हैं, तो न केवल पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा बल्कि दूध उत्पादन और आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।


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