पशुपालकों को घर बैठे मिलेगी पशु चिकित्सा सेवा
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। राजस्थान में पशुपालकों को घर बैठे पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। पशुपालक टोल-फ्री नंबर 1962 के जरिए मोबाइल वेटरनरी यूनिट (एमवीयू) को घर या फार्म पर बुला सकेंगे। साथ ही व्हाट्सएप या मोबाइल ऐप आधारित इंटेलिजेंट चैटबॉट विकसित करने पर भी जोर दिया गया है, जिससे पशुपालक शिकायत दर्ज कराने, एमवीयू की बुकिंग और सरकारी योजनाओं की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकें। राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के सभागार में केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य पशुपालन निदेशक डॉ. सुरेश चंद मीना एवं अन्य अधिकारियों के साथ केंद्रीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। केंद्रीय टीम ने योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे पशुपालकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
बैठक में खुरपका-मुंहपका और लंपी स्किन डिजीज जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए समयबद्ध टीकाकरण तथा रोग निगरानी को मजबूत करने पर जोर दिया गया। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत देशी गोवंश के नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान का दायरा बढ़ाने तथा सेक्स-सॉर्टेड सीमन और आईवीएफ तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट के तहत डेयरी सहकारिता, दूध प्रसंस्करण और गुणवत्ता जांच व्यवस्था मजबूत करने तथा दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। वहीं नेशनल लाइवस्टॉक मिशन के तहत बकरी-भेड़, पोल्ट्री पालन, चारा उत्पादन और पशुधन आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाओं की समीक्षा की गई।
केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित चैटबॉट को सरल हिंदी और राजस्थानी भाषा में यूजर-फ्रेंडली बनाने पर जोर दिया, ताकि दूरदराज के पशुपालक भी डिजिटल पशु चिकित्सा सेवाओं का आसानी से लाभ उठा सकें। बैठक में पशुपालन विभाग, राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड और राज्य डेयरी संघ के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।