बेटियां कृषि-पशुपालन शोध में बढ़ाएं भागीदारी : राज्यपाल

नई दिल्ली 16-Oct-2026 03:49 PM

बेटियां कृषि-पशुपालन शोध में बढ़ाएं भागीदारी : राज्यपाल

(सभी तस्वीरें- हलधर)

बीकानेर। राजस्थान के राज्यपाल  हरिभाऊ बागडे ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, ग्रामीण परिवारों को सतत आजीविका देने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में पशुपालन की अहम भूमिका है। उन्होंने पशु चिकित्स विज्ञान की छात्राओं से कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में शोध कार्यों में आगे बढ़कर योगदान देने का आह्वान किया।

राज्यपाल बीकानेर स्थित राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। पशु चिकित्सा, पशुपालन और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी उन्हें शोध एवं नवाचार के माध्यम से नई संभावनाएं तलाशनी चाहिए।

राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर

बागडे ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। गिर, थारपारकर, साहिवाल और मुर्रा जैसी उन्नत नस्लों का देश के दुग्ध उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है। राजस्थान देश के कुल दुग्ध उत्पादन में करीब 14.51 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

उन्होंने डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि पशुपालन और कृषि एक-दूसरे के पूरक हैं। किसान खेती के साथ दुग्ध उत्पादन कर अपनी आय में अतिरिक्त वृद्धि कर रहे हैं। ऐसे में पशुपालन को आधुनिक तकनीक, बेहतर नस्लों, वैज्ञानिक प्रबंधन और शोध से जोड़ना जरूरी है।

युवाओं की प्रतिभा देश की ताकत

राज्यपाल ने कहा कि भारत में प्रतिभाशाली युवाओं की कोई कमी नहीं है। देश के युवाओं की बौद्धिक क्षमता और कल्पनाशक्ति मजबूत है। दुनिया की बड़ी कंपनियों में भारतीय युवा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी क्षमता का अधिकतम उपयोग देश के विकास में करने का आह्वान किया।

उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है। विदेशी ताकतें युवाओं को नशे की ओर धकेलने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे में जागरूक नागरिकों और युवाओं को मिलकर नशे के खिलाफ वातावरण तैयार करना होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नशामुक्त भारत की परिकल्पना को साकार करने में सभी से योगदान देने का आह्वान किया।

शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं

बागडे ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में विवेक, समझ, नैतिकता और ईमानदारी का विकास करना भी है। शिक्षित युवा अपनी क्षमता और ज्ञान का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के विकास में करें।

623 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां

दीक्षांत समारोह में कुल 623 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 462 स्नातक, 141 स्नातकोत्तर और 20 विद्या-वाचस्पति की उपाधियां शामिल हैं। वहीं 42 विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए गए। इनमें 2 कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 36 स्वर्ण पदक, 2 रजत पदक और 2 कांस्य पदक शामिल हैं।

छात्रावास का लोकार्पण

इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में 2.55 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित कन्या छात्रावास का लोकार्पण किया। साथ ही विश्वविद्यालय के वर्चुअल टूर, ‘राजुवास अवलोकन’ पुस्तिका, वार्षिक प्रतिवेदन 2025-26 और राजुवास न्यूजलेटर के नए अंक का भी लोकार्पण किया। कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने विश्वविद्यालय की प्रगति का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।


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